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जोधपुर. प्रदेश में पिछले चार दिन से जारी शीतलहर और पाले से फसलों को भारी नुकसान हुआ है। सब्जियां और फल भी अछूते नहीं रहे। चूरू में पारा शून्य से एक डिग्री नीचे पहुंचा वहीं जयपुरवासियों ने सीजन की सबसे सर्द रात गुजारी। इस बीच पाले से फसलों को हुए नुक्सान ने किसानों के आंसू निकाल दिए हैं। पाले से गेहूं, जौ, चना, मेथी, जीरा, सौंफ, पालक, टमाटर सहित अन्य कई फसलों को चौपट कर दिया है।
किसानों ने प्रशासन से भी सहायता की गुहार की है। जयपुर में पिछली रात मौसम की सबसे सर्द रात रही। पारा लुढ़कते हुए 2.1 डिग्री पहुंच गया। यहां दिन में निखरी धूप भी राहत नहीं दे पाई। राज्य के अन्य इलाकों में भी बर्फीली हवाओं से लोगों के चैन नहीं मिल रहा। श्रीगंगानगर में तापमान शून्य डिग्री के आसपास बना हुआ है। उदयपुर, अजमेर, जैसलमेर सहित प्रदेश के विभिन्न इलाकों में पिछली रात तापमान में तीन डिग्री तक गिरावट आई।
मारवाड़ : जीरे ने किसानों को रुलाया
मारवाड़ में निरंतर पड़ रही कड़ाके की ठंड के कारण पाले से जीरे की फसल नष्ट होने के कगार पर पहुंच चुकी है। कृषि विभाग की मानेंंे तो जोधपुर जिले में जीरे की फसल 20 से 30 फीसदी नष्ट हो चुकी है। फिलहाल जीरे की फसल फूल से दाने में परिवर्तित हो रही है। ठंड से इसमें छाछिया रोग लग गया है। जोधपुर जिले में सर्वाधिक नुकसान मथानिया में हुआ है, जहां जीरे की 30 फीसदी फसल नष्ट हुई है।
वहीं बालेसर, मंडोर, तिंवरी, पीपाड़, भोपालगढ़, बिलाड़ा और आसोप में भी जीरे की फसल को नुकसान हुआ है। जोधपुर कृषि जोन में 1,03,000 हेक्टेयर में जीरे की बुवाई होती है। अकेले जोधपुर जिले में 40 हजार हेक्टेयर में जीरे की पैदावार हो रही है।
गत वर्ष भारी वर्षा व ओले गिरने से जीरे व ईसबगोल की फसल चौपट होने से किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा था। जोधपुर कृषि जोन में आने वाले बाड़मेर और नागौर की भी यही स्थिति है। संभाग के जैसलमेर, पाली में भी जीरे की फसल को खासा नुकसान हुआ है।
40 प्रतिशत तक नुकसान
पाली. यहां ठंड से जीरा, गेहूं, सरसों, मेथी, ईसबगोल, चना और सब्जियों की फसलों में 30 से 40 प्रतिशत का नुकसान हुआ है। सर्वाधिक नुकसान सोजत, रायपुर व जैतारण क्षेत्र में हुआ है। कृषि अधिकारियों ने नुकसान का सर्वे शुरू कर दिया है।
जीरे की फसल को 25 तक नुकसान
शीतलहर के प्रकोप से बाड़मेर जिले में जीरा, सर्सो, अरण्डी और गेहूं की फसलों को आंशिक नुकसान हुआ है। शीतलहर के प्रकोप से जीरे की फसल में 25 फीसदी, सरसों में 5 फीसदी और अरण्डी को 20 प्रतिशत नुकसान हुआ है। धोरीमन्ना, शिव, गुढ़ामलानी व सेड़वा आदि क्षेत्र में सरसों को और सिवाना क्षेत्र में अरण्डी को नुकसान हुआ है।
15 प्रतिशत तक खराबा
जैसलमेर. जिले में पाला पड़ने से लगभग 10-15 प्रतिशत फसल खराबे की आशंका है। मुख्य रूप से अगेती फसल को नुकसान हुआ है। कलेक्टर विनोद पण्ड्या ने बताया कि अभी तक आधिकारिक तौर पर सर्वे नहीं करवाया गया है। फिर भी सरकार को इसकी सूचना दे दी गई है। कृषि अनुसंधान अधिकारी जगदीशचन्द्र मेघवंशी ने बताया कि अनुमान के तौर पर अगेती फसलों में रायड़े को 10-15 प्रतिशत का नुकसान हुआ है।
बचाव के लिए यह करें
पाले के प्रकोप से बचने के लिए सिंचाई करें। मेड़ों पर धुआं करें। गंधक के तेजाब का एक लीटर पानी में एक एमएल का घोल बनाकर फसल पर छिड़काव करें।