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इंदौर. इंदौर के जिला न्यायालय परिसर में आने वाले हजारों वाहनों के कारण जगह ही नहीं बचती। जिसकी जहां इच्छा हो वाहन खड़े कर जाता है। इससे सुरक्षा व्यवस्था को भी खतरा गया है। खुदा न खास्ता यदि कोई हादसा हो जाए तो परिसर में न तो एंबूलेंस जाने का रास्ता मिलेगा न ही फायर दमकलें।
छह-सात साल पहले भोपाल कोर्ट परिसर में हुए बम विस्फोट के बाद इंदौर पुलिस प्रशासन ने यहां भी सुरक्षा पुख्ता प्रबंध किए थे। कुछ समय तक यह व्यवस्था जारी रही लेकिन वर्तमान में इसकी अनदेखी की जा रही है।
भोपाल की घटना के बाद कोर्ट प्रशासन की सहमति से पुलिस ने दो प्रमुख द्वार में से एक (प्रेस क्लब के सामने) को वाहनों के लिए बंद कर केवल पैदल वालों के लिए रखा। दूसरे द्वार (संभागायुक्त कार्यालय के करीब) को सभी के लिए खुला रखा।
न्यायाधीशों, स्टाफ और अभिभाषकों को छोड़ शेष वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया। विकल्प के तौर पर बाहरी वाहनों के लिए गांधी हाल परिसर में पार्किग व्यवस्था की थी। गांधी हॉल में पार्किग व्यवस्था बदस्तूर जारी है किंतु पुलिस की व्यवस्था ढीली होने से कोर्ट के प्रमुख द्वार पर बाहरी वाहनों को सख्ती से रोकना बंद हो गया।