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बीकानेर. पिछले चार दिनों से बदले मौसम के मिजाज ने लोगों को सर्दी से कंपाकर रख दिया। पिछले तीन दिनों से तापमान तीन से पांच डिसे के करीब है। बुधवार को भी अधिकतम तापमान 19.8 डिसे व न्यूनतम पांच डिसे दर्ज किया गया। मंगलवार की अपेक्षा बीती रात न्यूनतम पारा दो डिसे गिरा। इससे सर्दी और बढ़ गई। जम्मू-कश्मीर में हुई बर्फबारी व उत्तरी बर्फानी हवाओं से लोगों को अधिक सर्दी लग रही है।
दो दिन पहले छाए बादल अब आसमान में नहीं दिखे लेकिन सर्दी और बढ़ने की संभावना है। प्रदेश में पिछले चार दिन से जारी शीतलहर ने लोगों को ठिठुराकर रख दिया है। इस बीच जयपुरवासियों ने मंगलवार को इस मौसम की सबसे सर्द रात गुजारी। यहां तापमान लुढ़कते हुए 2.1 डिग्री पहुंच गया। पिछले पांच वर्र्षो में भी जनवरी माह में यहां ऐसी सर्दी नहीं पड़ी थी। ठंडी हवाएं शूल सी चुभती रहीं। दिन में निखरी धूप भी राहत नहीं दे पाई।
लोग लबादे ओढ़े ठिठुरन दूर होने का इंतजार करते रहे। राज्य के अन्य इलाकों में भी बर्फीली हवाओं से लोगों को चैन नहीं मिल रहा। चूरू में तापमान शून्य से एक डिग्री नीचे जबकि श्रीगंगानगर में शून्य डिग्री के आसपास बना हुआ है। उदयपुर, अजमेर, जैसलमेर सहित प्रदेश के विभिन्न इलाकों में पिछली रात तापमान में तीन डिग्री तक गिरावट आई।
सब्जियों को नुकसान
पाले से चौमूं, शाहपुरा, रामगढ़, चाकसू, फागी, आमेर व बस्सी आदि स्थानों से आने वाली हरी सब्जियों की फसल को नुकसान हुआ है। इससे जयपुर मंडी में आने वाली सब्जियों के व्यापार पर भी खासा असर पड़ सकता है। व्यापारियों का मानना है कि पाला पड़ने के कारण अगर फसल को ज्यादा नुकसान हुआ तो सब्जियां महंगी हो सकती है। चाकसू के रामजीलाल ने बताया कि पाले के कारण दो दिनों में पंद्रह से बीस प्रतिशत फसल को नुकसान हुआ है।
जिन हरी सब्जियों पर ज्यादा असर पड़ा उसमें पत्तागोभी, मूली, पालक, मैथी, हरा धनिया, हरी मिर्च, बालोड़ व फूल गोभी आदि है।पाले से हरी सब्जियां या तो गल जाएगी या दागदार हो जाएगी। सब्जी के आढ़तिया धर्मदास मोटवानी ने बताया कि पाले के कारण टमाटर में दाग पड़ने लग गया है।
पाला-पानी जमने से फसलें चौपट
बीते एक महीने में मौसम के फ्लक्चुएशन से सब्जी, मसाला सहित कई फसलों को नुकसान हुआ है। श्रीडूंगरगढ़ तहसील के कई गांवों में फूलगोभी, चना, सरसों सहित कई फसलें प्रभावित हुई हैं। पाला तो एक-दो दिन ही पड़ा लेकिन पौधों पर पड़ी ओस बर्फ में बदल जाने से कई दर्जन हैक्टेयर में पौधे झुलस गए। बर्फ जमने से पौधों की नसें फट जाती है। पौधों की बढ़वार रुकने के साथ ही उसका असर उत्पादन में भी पड़ा है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि दो डिसे तक तापमान पहुंचता है तब पाले की अधिक आशंका रहती है। इस बार सिर्फ दो दिन तापमान दो से तीन डिसे के बीच रहा। इस कारण पाले से फसलों को व्यापकस्तर पर तो नुकसान नहीं हुआ लेकिन इससे अछूते भी नहीं रहे। घरों व खेतों पर खड़े सैकड़ों फलदार पौधे झुलस गए। खाजूवाला व लूणकरणसर में बेर व आंवले के पौधे पाले से झुलस गए।
सीआईएएच ने तो पाले के डर से निर्धारित समय से दो सप्ताह पूर्व ही बेर की फसल तोड़ ली क्योंकि वर्ष 2005 में यहां कई हैक्टेयर में आंवले की फसल चौपट हो गई थी। राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय अनुसंधान निदेशक डॉ.अभयसिंह राठौड़ का कहना है कि दिन में चल रही हवा यदि शाम को बंद हो जाए किसान सावचेत रहे। शाम को खेत के आसपास धुआं करें व अगले दिन सिंचाई करें। उन्होंने माना कि जिन फसलों पर ओस बर्फ में बदल जाए वहां किसानों को अधिक सावचेत रहना चाहिए।