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भोपाल. राजधानी में कई मिनी बस, स्टार बस और मैजिक बसें निर्धारिट रूट पर आखिरी स्टाप तक नहीं जाती है। इससे लोगों को मजबूर होकर आटो करना पड़ता है। कई बार आटो भी नहीं मिलता, जिससे उन्हें घंटों इंतजार करने या पैदल चलने पर मजबूर होना पड़ता है। इसकी शिकायतें आरटीओ और जिला प्रशासन तक भी पहुंची है, जिसके कारण अब टर्मिनल व्यवस्था को फिर से लागू करने की मशक्कत शुरू हो गई है।
इसके तहत संभव है कि फरवरी से सैनिक कल्याण बोर्ड के प्रतिनिधि आखिरी स्टापेज पर बैठकर कर बसों के पहुंचने की मानीटरिंग करेंगे। इस व्यवस्था को लागू करने में आर्थिक दिक्कतें हैं, इसलिए फिलहाल तो शहरवासी निर्धारित रूटों पर परेशानी ही झेल रहे हैं। भैंसाखेड़ी, साकेत नगर सहित कई इलाकों में आटो पांच रूपए प्रति सवारी लेकर पब्लिक ट्रांसपोर्ट का काम करने लगे हैं।
कालोनियों में इंटर कनेक्टिविटी नहीं
शहर की अधिकांश कालोनियों और मोहल्लों में बसों की इंटरकनेक्टिविटी नहीं है। कुछ इलाकों में फीडर बसों के रूट ऐसे हैं, जिनसे कालोनीवासियों की समस्या कम नहीं होती। साकेत नगर में सिर्फ मेनरोड पर मिनी बस चलती हैं, जबकि भेल क्षेत्र के एक बड़े हिस्से में कोई बस सेवा नहीं है।
कई शिकायतें मिली हैं
कई रूटों पर आखिरी स्टाप तक बसें नहीं पहुंचने की शिकायतें मिली है। रात के समय इंडस गार्डन और कोलार क्षेत्र में बस वाले नहीं जाते। इस मामले में मानीटरिंग के लिए जिला प्रशासन नई व्यवस्था पर विचार कर रहा है।
- दिनेशचंद्र जैन, आरटीओ, भोपाल
फरवरी से लागू करेंगे मानीटरिंग
पहले सैनिक कल्याण बोर्ड आखिरी स्टापों की मानीटरिंग करता था, अब फिर उसी व्यवस्था को लागू कर रहे हैं। संभवत: फरवरी में इसे लागू कर देंगे। इसके लिए कुछ बैठकें हो चुकी हैं। अब सिर्फ आर्थिक व्यवस्था पर विचार करना है। उससे स्थिति में सुधार आने की उम्मीद है।
- आरके माथुर, कलेक्टर, भोपाल
बढ़ाएंगे स्टार बसें
रूट-2 को रीवाइज कर रहे हैं। साथ ही रूट-8 पर अभी बसें बंद हैं। यहां पूरा रेवन्यू नहीं मिल रहा था, इसलिए इस रूट की बसों को दूसरे रूटों पर लगाया गया है। अभी 39 बसें हैं, उन्हें बढ़ाया जाएगा। नई चार बसें चलाने की योजना है। साथ ही चार नए रूटों पर विचार चल रहा है। कालोनियों इंटर कनेक्टिविटी के लिए फीडर बसें चलेंगी, लेकिन कारीडोर बनने के बाद उस पर काम होगा। हमारे पास इस से निपटने के लिए भी योजना है।
- कमल नागर, सीईओ, भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड (बीसीएलएल)
भुक्तभोगियों का कहना
भैंसाखेड़ी से बैरागढ़ तक जाना हो तो कोई मिनी या स्टार बस नहीं मिलती। पहले यहां स्टार बसें आती थी, लेकिन अब नहीं आती। अब सिर्फ आटो करके जाने का ही रास्ता बचता है।
- भगवानदास कोटवार, निवासी भैंसाखेड़ी
यहां बैरागढ़ चौराहे पर रात 9.10 तक बसें मिल जाती हैं, उसके बाद नहीं मिलती। सुबह भी 8.30 बजे बाद बसें शुरू होती हैं।
- अशोक गौर, पान व्यवसायी, बैरागढ़ चौराहा
दिन में तो बसें आती-जाती रहती है, लेकिन रात को 8 बजे बाद परेशानी होती है। इसके बाद सिर्फ आटो ही मिलता है। बसों का कोई निश्चित टाइम नहीं है, कभी-कभी उनके लिए स्टाप पर घंटों इंतजार करना पड़ता है।
- पवन शर्मा, गांधीनगर
गांधीनगर से पुराने बस स्टेंड जाने की बड़ी परेशानी है। आटो करके ही जाना पड़ता है। आटो महंगा पड़ता है, इसलिए पुराने बस स्टेंड के लिए बस चलनी चाहिए।
- दीपक जीवनानी, व्यवसायी