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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur कोरबा. बांगो बांध में एनटीपीसी की सीपत व सीएसईबी की कोरबा-पश्चिम विस्तार परियोजना के लिए ही रिजर्व स्टाक है। समय रहते यदि स्टापडेम व एनीकट की योजना पर कार्य नहीं हुआ, तो नए संयंत्रों के सामने जल संकट खड़ा हो सकता है।
जिले में नए विद्युत संयंत्रों की स्थापना यहां उपलब्ध कोयला व पानी को देखते हुए की जा रही है। जिस तरह एसईसीएल कोयले के उत्पादन में बढ़ोतरी की कवायद कर रहा है, उससे ऐसा लग नहीं रहा है कि भविष्य में विद्युत संयंत्रों को कोयले की कमी होगी। खदानों में कोयला पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है, पानी के संबंध में ऐसा नहीं कहा जा सकता।
नए विद्युत संयंत्रों को पानी कहां से मिलेगा, यह अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। कोरबा-चांपा रोड पर पताढ़ी के निकट निर्माणाधीन 600 मेगावाट का लैंको पावर प्लांट हसदेव नदी से पानी प्राप्त करने प्रयासरत है। पाइप लाइन नदी से संयंत्र तक बिछाने की तैयारी चल रही है। यहां एनीकेट बनाकर पानी एकत्र किया जाएगा। आवश्यकतानुसार जल की आपूर्ति हो पाएगी या नहीं, इसमें संदेह है। छुरी व धनरास में वंदना पावर लिमिटेड व धीरू पावर जोन द्वारा विद्युत संयंत्र स्थापित करने प्रक्रिया की शुरुआत हो चुकी है।
इन दिनों भूमि अधिग्रहण का कार्य चल रहा है। इसके अलावा सीएसईबी कोरबा-पश्चिम विस्तार परियोजना प्रस्तावित है। इसका पानी कहां से लिया जाएगा, स्पष्ट तौर पर कोई कुछ नहीं बता पा रहा है। जल संसाधन विभाग के अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि वर्तमान स्थिति में नए विद्युत संयंत्रों को बांगो बांध से पानी नहीं दिया जा सकता। बांध में वैसे भी पर्याप्त जल का भराव नहीं हो रहा है। इस वर्ष बांध में 359.66 मीटर लेबल पर 3 हजार 46 मिलियन घन मीटर पानी का भराव हुआ था।
आज हालत यह है कि 347.48 मीटर लेबल पर 1230 मिलियन घन मीटर पानी बांध में शेष है, जो एक तिहाई ही है। वर्षा शुरू होने में अभी 5 माह का समय शेष है, तब तक विद्युत संयंत्रों को पानी दिया ही जाएगा। 370 मिलियन घन मीटर पानी बांध से निकाल नहीं सकते, यह गेट के नीचे एकत्र रहता है। 441 मिलियन घन मीटर पानी वर्तमान विद्युत संयत्रों को दिया जाएगा।
120 मिलियन घन मीटर पानी एनटीपीसी सीपत का रिवर्ज स्टॉक शेष जल की मात्रा में शामिल है। इन सबसे यह बात तो तय है कि बांगो बांध का पानी किसी नए विद्युत संयंत्र को नहीं मिल सकता, जिले में विद्युत संयंत्र लगाने के लिए शासन के साथ नए समझौते हो रहे हैं। शहर की पेयजल व्यवस्था भी बांगो बांध के पानी पर निर्भर है।
आगे चलकर पेयजल के लिए 14 मिलियन घन मीटर पानी की आवश्यकता होगी। बालको के प्रस्तावित 300 व 1200 मेगावाट वाले विद्युत संयंत्र के लिए 32 मिलियन घन मीटर पानी की जरुरत है। पिछले मानसून में बांगो बांध अपनी जल आहरण क्षमता से केवल आधा ही भरा था अर्थात जल संग्रहण का स्तर 351 मीटर था, जो अब घट कर 347.38 मीटर पर आ टिका है। अधिकारी बताते हैं कि वर्तमान संयंत्रों को देने पानी पर्याप्त मात्रा में है। पर अन्य प्रस्तावित संयंत्रों के लिए नया बैराज बनाना जरूरी है।