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उदयपुर. उत्तर भारत में हुई बर्फबारी व शीतलहर के असर से मेवाड़ में बुधवार को लगातार चौथे दिन ठिठुरन बरकरार रही। दिन के तापमान में वृद्धि से राज्य के अन्य हिस्सों के लोग जहां राहत महसूस कर रहे थे, वहीं मेवाड़ में मंगलवार रात पारे में आई गिरावट ने ठंड के पिछले चार साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया। मंगलवार की रात मौसम की सबसे ठंडी रात रही। कड़ाके की ठंड ने संभाग में जनजीवन को झकझोर दिया है।
चित्तौड़गढ़ में न्यूनतम तापमान 2.8 डिग्री और उदयपुर में 4.4 डिग्री सेल्सियस रहा। चित्तौड़ में इससे पहले न्यूनतम तापमान वर्ष 2004 में -0.6 डिग्री रहा था। डबोक स्थित मौसम कार्यालय के अनुसार उदयपुर में अधिकतम तापमान 20.3 डिग्री रहा।
दिन में जहां लोग राहत महसूस कर रहे थे, वहीं शाम ढलते ही सर्दी का जोर बढ़ गया। सर्दी का असर स्कूली बच्चों व कार्यालयों में काम करने वाले लोगों की दिनचर्या पर भी रहा। संभाग में चित्तौड़ सबसे ठंडा रहा। बुधवार को यहां अधिकतम तापमान 16.4 डिग्री रहा जो संभाग मुख्यालय से चार डिग्री कम था। शीतलहर की वजह से धूप भी बेअसर रही।
उम्मीदों पर पाला
प्रदेश में चार दिन से जारी शीतलहर और पाले से फसलों को भारी नुकसान हुआ है। सब्जियां और फल भी अछूते नहीं रहे। इस बीच पाले से फसलों को हुए नुकसान ने किसानों के आंसू निकाल दिए हैं। पाले से गेहूं, जौ, चना, मेथी, जीरा, सौंफ, पालक, टमाटर सहित अन्य कई फसलों को चौपट कर दिया है। मेवाड़ में पाला पड़ने से 20 से 30 फीसदी तक नुकसान की जानकारी मिली है।
सर्वाधिक नुकसान उदयपुर के मावली क्षेत्र में हुआ, जहां फसलों को 50 फीसदी तक खराबा हुआ। चित्तौड़गढ़ में 15 फीसदी और राजसमंद में शीतलहर की वजह से सब्जियों की 30 फीसदी फसल को नुकसान पहुंचा। किसानों ने प्रशासन से भी सहायता की गुहार की है। उदयपुर जिले में रविवार व सोमवार रात पड़े पाले की वजह से मावली, वल्लभनगर, फतहनगर, धरियावद, कानोड़, भींडर व भटेवर आदि क्षेत्र में फसलों को नुकसान पहुंचा।
प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार सर्वाधिक नुकसान मावली में हुआ जहां 50 फीसदी तक खराबे की आशंका है। सहायक निदेशक (कृषि) सुधीर वर्मा के अनुसार जिले में सरसों की पछेती (तय समय के बाद बोई गई) फसल और चने की अगेती (तय समय से पहले बोई गई) फसल को 5-5 फीसदी खराबा और अन्य फसलों को 15 से 20 फीसदी खराबे का अनुमान है।
चित्तौड़गढ़ जिले में पाले के असर से गंगरार, बेगूं, भंसरोडगढ़, कपासन, निम्बाहेड़ा, आकोला, राशमी, छोटीसादड़ी आदि क्षेत्रों की फसलों को नुकसान हुआ है। सरसों में तीन से पांच फीसदी, अफीम में आठ से दस, चने को तीन फीसदी व सब्जियों की फसल को 10 से 15 फीसदी तक खराबा होने का अनुमान है। बुधवार दोपहर बाद हवा रुकने से किसान राहत महसूस की, किन्तु तापमान में आई गिरावट से पाला पड़ने का भय बरकरार है। कृषि अधिकारियों के अनुसार राजसमंद जिले में पाला तो नहीं पड़ा, लेकिन शीतलहर की वजह से सब्जी की फसल में 30 फीसदी खराबे का अनुमान है।
ठंडी हवाओं की वजह से सब्जियों के पौधे झुलस गए हैं। इसके साथ ही जिले में चने की फसल को 20 फीसदी, सरसों को 10 और गेहूं-जौ की अगेती फसल को पांच फीसदी नुकसान का अनुमान है। गेहूं व जौ की जिन फसलों में बालियां निकल चुकी हैं, उनको नुकसान ज्यादा हुआ है। जिले के कृषि अनुसंधान अधिकारी लक्ष्मीनारायण यादव के अनुसार शीतलहर का प्रकोप जारी रहा तो नुकसान बढ़ सकता है।