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मिल चलाने में जमीन आ सकती है आड़े

उदयपुर. उदयपुर कॉटन मिल को उदयपुर में ही चलाने में अब जमीन आड़े आ सकती है। नई डिजाइन के अनुरूप मिल का जो प्रस्ताव तैयार हुआ है उसके अनुरूप यहां जमीन नहीं है। यहां श्रमिकों की भर्ती को लेकर भी कुछ अड़चने सामने आ रही है। इसके अलावा भी कई ऐसे फेक्टर हैं जिनके मद्देनजर नेशनल टेक्सटाइल कापरेरेशन नए प्रस्ताव पर विचार कर रहा है।

उल्लेखनीय है कि उदयपुर कॉटन मिल में कार्यरत श्रमिकों में अधिकांश ने वीआरएस ले लिया था। इस कारण मिल में काम लगभग बंद था। वर्तमान में अधिकारियों सहित केवल 40 लोग ही बचे थे। एनटीसी के अधिकृत सूत्रों के अनुसार घाटे में चल रही मिलों के नवीनीकरण के लिए एनटीसी ने सरप्लस जमीनें बेचने का प्रस्ताव बनाया था। उदयपुर में भी जमीन बेचकर करीब पंद्रह करोड़ रुपए जुटाए गए। इसके बाद करीब 16-17 एकड़ जमीन शेष बची।

बताया गया कि पूर्व में यह स्पिनिंग मिल थी। इसी मिल के नवीनीकरण की योजना बनाई गई थी। बाद में नोर्दन इंडिया टेक्सटाइल रिसर्च इंस्टीट्यूट (न्रिटा) ने मिल की नई डिजायन तैयार की जिसमें करीब 95 करोड़ रुपए की लागत से कपड़ा मिल का प्रस्ताव है। बताया गया कि नई डिजायन के अनुरूप कपड़ा मिल चलाने के लिए काफी मशीनों की आवश्यकता होगी और इसके लिए उदयपुर कॉटन मिल के पास जो जमीन बची है वह पर्याप्त नहीं है।

इसके अलावा उदयपुर में इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी है। यहां सूत कपास आदि का उत्पादन ज्यादा नहीं है तथा जरूरत के मुताबिक लुम्स भी नहीं है। पॉवर को लेकर भी संकट रहता है। इनके अलावा ऐसे कई फेक्टर हैं जिनके अध्ययन के बाद एनटीसी के अधिकारी उदयपुर में कॉटन मिल चलाने की बजाए अन्यत्र स्थानांतरित करने के पक्ष में है।

इसकी जमीन बेचकर रुपया नई यूनिट में लगाने का प्रस्ताव है। मिल को ब्यावर भी स्थानांतरित करने का प्रस्ताव है। इसमें अहम बात यह है कि ब्यावर स्थानांतरण के बाद भी मिल का नाम उदयपुर कॉटन मिल अथवा न्यू उदयपुर कॉटन मिल रखा जाएगा।

बंद करवाने वाले ही खुलवाने में

एनटीसी के अधिकारी इस बात को लेकर भी हैरत में हैं कि उदयपुर कॉटन मिल में कार्यरत श्रमिकों को वीआरएस दिलवाकर मिल बंद करवाने में कतिपय नेताओं का हाथ रहा था, वे ही मिल चालू करवाने के लिए आंदोलन करने में जुटे हैं। पहले उन नेताओं ने श्रमिकों को वीआरएस देने पर जोर दिया। जब वीआरएस दे दिया गया तो नई भर्ती में बाधा खड़ी हो गई। अब वे ही नेता मिल चालू करने की बात कर रहे हैं।





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