Breaking News 
bhaskar Web English


HomeNewsRajasthanUdaipur Udaipur

सौर वेधशाला में लगेंगे नए टेलीस्कोप

उदयपुर.laboratory सूर्य का बारीकी से अध्ययन करने के लिए उदयपुर में स्थापित सौर वेधशाला में नए टेलीस्कोप स्थापित किए जाएंगे। करीब तीन दशक पूर्व यहां टेलीस्कोप स्थापित किए गए थे। सौर वेधशाला, उदयपुर ने इसके लिए भारत सरकार के स्पेस मंत्रालय को प्रोजेक्ट बनाकर भेजा था। टेलीस्कोप स्थापित करने का जिम्मा बेल्जियम की एक कंपनी को सौंपा गया है। टेलीस्कोप बनाने के लिए कंपनी का दल गत माह उदयपुर सौर वेधशाला का दौरा कर चुका है।

सौर वैज्ञानिकों को कहना है कि समय के साथ कई तकनीक विकसित हुई है। तीस वर्र्षो से जिन टेलीस्कोप से सूर्य के सतह का बारीकी से अध्ययन किया जा रहा है उसमें आधुनिकता का समावेश करने के लिए नए टेलीस्कोप की आवश्यकता है। इसको ध्यान में रखते हुए सौर वेधशाला में टेलीस्कोप बदलने की कवायद पहले से ही शुरू हो गई है। इस कार्य के लिए भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग की ओर से विशेष बजट जारी होता है।

तैंतीस वर्ष पूर्व स्थापित हुआ यूएसओ

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की वित्तीय सहायता और वेधशाला ट्रस्ट, अहमदाबाद की छत्रछाया में उदयपुर के फतहसागर झील के एक टापू पर उदयपुर सौर वेधशाला की स्थापना सितंबर 1975 में हुई। सूर्य का सौर प्रेक्षण स्थल ऐसे उचित स्थान पर हो जहां संवाहनिक वायु धाराएं न्यूनतम हों। इस उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए सौर वेधशाला की स्थापना पानी के मध्य टापू पर की गई।

विश्वयापी परियोजना गोंग :

अक्टूबर 1995 में उदयपुर सौर वेधशाला ने एक ओर मील का पत्थर पार किया जब यह विश्वयापी परियोजना ‘गोंग’ की महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में विश्व मानचित्र पर उभर कर आया। विश्व की 15 वेधशालाओं के साथ यूएसओ में परीक्षण अभियान की शुरूआत 1986 में हुई थी।

गोंग परियोजना के तहत उदयपुर में 15 लाख डालर मूल्य का एक विशिष्ट उपकरण उदयपुर में स्थापित किया गया। यह स्वचालित उपकरण सूर्य का पीछा करते हुए प्रत्येक मिनट में उसके आंकिक चित्र लेता रहता है।

सौर वेधशाला में लगे टेलीस्कोप का उपयोग

वेधशाला की स्थापना के बाद प्रारंभ में सी.एस.आई.आर.ओ. आस्ट्रेलिया से प्राप्त 12 फीट लंबे स्पार-दूरबीन को 16 फीट ऊंचे शेड के अंदर स्थापित किया गया था जिसे प्रेक्षण के समय दूर खिसका दिया जाता था। इसके बाद 40 फीट ऊंचे टॉवर पर स्थापित किया गया था। 1985 में एक और दूरबीन एन.ओ.ए.ए. अमेरिका से प्राप्त हुई।

1991 में तीसरी दूरबीन उपलब्ध हुई जिसे पूर्व में लेह लद्दाख में 4500 मीटर की ऊंचाई पर माउन्ट नीमू में राष्ट्रीय खगोल वेधशाला सर्वे के लिए उपयोग में लिया गया। तीनों टेलीस्कोप का उपयोग विभिन्न प्रकार के प्रेक्षण कार्यकलापों में सौर गतिविधियां, स्पैक्ट्रम अध्ययन, वेग एवं चुंबकीय क्षेत्र मापन में किया जाता रहा है।

उदयपुर सौर वेधशाला विश्व की सौर वेधशालाओं में अपना स्थान रखती है। यहां सूर्य के प्रकाश के स्पैक्ट्रम से सूर्य की संरचना का ज्ञान होता है। सूर्य एक बहुत बड़ी ब्रम्हाण्डीय (कॉस्मिक) प्रयोगशाला है जिसकी मदद से अन्य तारों के बारे में जानकारी हासिल की जा सकती है, जो कि दुनिया की बड़ी से बड़ी दूरबीन से भी बिन्दु मात्र दिखाई देते है। इस प्रकार के अध्ययन के लिए समय के साथ आधुनिक टेलीस्कोप की डिमांड बनी रहती है। काफी पुरानी दूरबीन होने से इन्हें बदलने की प्रक्रिया चल रही है।
-डॉ. अशोक अंबास्था,वरिष्ठ सौर वैज्ञानिक, यूएसओ, उदयपुर





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: