जोधपुर. अनुदानित स्कूलों के लिए स्वीकृत 3300 पदों के लेप्स होने का खतरा मंडराने लगा है। सरकार इन पदों के लिए अनुदान नहीं दे रही हैं, जिसके चलते इन स्कूलों में अध्यापन बाधित होने लगा हैं। जोधपुर की अनुदानित स्कूलों में करीब 235 पद रिक्त हैं। पद समाप्ति पर लटकी तलवार के कारण अनुदानित स्कूलों में छात्र संख्या कम होने के साथ ही शिक्षा की गुणवत्ता पर भी असर पड़ने लगा है।
इस कारण परीक्षा परिणाम खराब रहने से संस्थाओं की साख पर भी असर पड़ रहा है। वर्ष 2003-04 में गत सरकार ने 106 करोड़ राशि अनुदानित स्कूलों के लिए स्वीकृत की थी। जिसे वर्ष 2005 में वर्तमान सरकार ने घटाकर पहले 92 करोड़ व और बाद में 80 करोड़ कर दिया। विगत वर्षो में संस्थाओं के खर्च में वृद्धि हुई, उन पर अनुदान की स्वीकृति नहीं दी जा रही है।
अनुदान फ्रीज करने के कारण कई स्कूलों के कर्मचारियों को बढ़े हुए 3 प्रतिशत, 5 प्रतिशत और 11 प्रतिशत का डीए समायोजित वेतन नहीं मिल पा रहा है। कर्मचारियों की वार्षिक वेतन वृद्धि भी वेतन में नहीं जोड़ी जा रही है। कई स्कूलों में मार्च 2007 में आज तक कर्मचारियों को वेतन देने के लाले पड़ गए हैं। यही नहीं, पीएफ राशि पीडी खातों में जमा करवाने के लिए पैसा नहीं है। जब तक राशि जमा नहीं होती तब तक कोषागार में वेतन बिल पारित नहीं हो सकते। इस कारण कई विद्यालयों के कर्मचारी वेतन से वंचित हो रहे हैं।
स्कूलों को अपने हिस्से की राशि जमा करवाने के बाद ही अनुदान मिलता है, जिसकी अनुपालना नहीं होने से वेतन अटक रहे हैं। कर्मचारियों की शिकायत पर जांच होती है। बजट के कारण पदों के लेप्स होने, अन्य मामले व निर्णय तो सरकार स्तर के हैं।
—केसी पुरोहित, अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी, माध्यमिक शिक्षा,जोधपुर
बजट लेप्स करने के कारण ही सभी समस्याएं पैदा हुई हैं। प्रदेशभर की अनुदानित स्कूलों से 3300 पद लेप्स होने के कगार पर हैं, अगर ये समाप्त हो गए तो अनुदानित स्कूलों की ओर विद्यार्थियों का रुझान नहीं रहेगा।
—जेपी व्यास, जिलाध्यक्ष, अनुदानित शिक्षक संघ।