जोधपुर. माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की परीक्षाओं से ठीक पहले पल्स पोलियो महाअभियान में गुरुजन नौनिहालों को पोलियो की खुराक पिलाने में व्यस्त हो जाएंगे। इसी समय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की प्रायोगिक परीक्षाएं होंगी। ऐसे में विद्यार्थियों की परीक्षा तैयारी पर प्रतिकूल असर पड़ने का अंदेशा है। अगले माह 10 फरवरी को शुरू होने वाले पल्स पोलियो अभियान से ठीक पहले बोर्ड की प्रायोगिक परीक्षाओं का समय विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण होता है।
ऐसे में शिक्षक पोलियो अभियान को सफल बनाने के लिए करीब एक सप्ताह तक स्कूल से दूर रहेंगे। पहले पोलियो दवा पिलाने के लिए प्रशिक्षण के लिए दो दिन और फिर 10 फरवरी को बूथ पर तैनात रहना होगा। उसके बाद तीन दिन तक डोर टू डोर दवा पिलाने के लिए शिक्षकों को लगाया जाता है। इस तरह से सात दिन तक शिक्षक स्कूलों से नदारद रहेंगे।
यही समय विद्यार्थियों के लिए नुकसान दायक साबित होगा। इतना ही नहीं मार्च में होने वाली बोर्ड की मुख्य परीक्षाओं के लिए स्कूलों में अध्यापकों को अपना पाठ्यक्रम पूरा करवाने और रिवीजन करवाने का समय माना जाता है,ऐसे समय में शिक्षकों की ड्यूटी किसी अभियान में लगाने से शिक्षण में बाधा आती है।
अधिकारी का मत
प्रायोगिक परीक्षाओं को देखते हुए विज्ञान के अध्यापकों को पल्स पोलियो की दवा पिलाने के लिए नहीं भेजने की गुहार जिला प्रशासन से की जाएगी ताकि शिक्षण व्यवस्था पर असर नहीं पड़े।
—अशोक विश्नोई, शैक्षिक प्रकोष्ठ अधिकारी,माध्यमिक शिक्षा
शिक्षकों को परीक्षा के समय पल्स पोलियो में लगाए जाने का खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना होगा। शिक्षक बच्चों को दवा पिलाने में व्यस्त रहेंगे इससे प्रायोगिक परीक्षाओं का परिणाम प्रभावित होगा। इसका विरोध सरकार के पास दर्ज करवाया गया है।
—सियाराम,अध्यक्ष, सियाराम शिक्षक संघ
बोर्ड की परीक्षाओं के समय शिक्षकों की अन्यत्र ड्यूटी लगाने से पहले प्रशासन व सरकार को सोचना होगा कि इससे परीक्षा परिणामों पर असर क्या पड़ेगा, राष्ट्रीय कार्यक्रम का विरोध नहीं है लेकिन इसके लिए दूसरे विभागों के कर्मचारी भी तो हैं, संघ इस नीति का विरोध करेगा।
—आरएल ग्वाला, प्रदेश महासचिव, शिक्षक संघ प्रगतिशील