इंदौर. मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने आदेश दिया कि कलेक्टर द्वारा निर्धारित गाइड लाइन के आधार पर किसी भी संपत्ति का मूल्य तय कर स्टाम्प ड्यूटी नहीं मांगी जा सकती। बाजार मूल्य वही होगा जो प्लॉट आवंटन के समय सोसायटी ने सदस्य से वसूला।
फैसला इंदौर खंडपीठ के जस्टिस विनय मित्तल ने वरिष्ठ अधिवक्ता चंपालाल यादव के माध्यम से लगी याचिका पर दिया। श्री यादव ने सुदामानगर सोसायटी के सदस्यों द्वारा वर्षो पूर्व खरीदे प्लॉट की रजिस्ट्री आज के बाजार मूल्य पर करने के खिलाफ याचिका लगाई थी। कोर्ट ने कलेक्टर, इंदौर को भी निर्देश दिए कि इस निर्णय के परिप्रेक्ष्य में फिर से आदेश निकालें।
रिटायर्ड शिक्षिका गंगाबाई रमेशचंद्र सोलंकी ने शिक्षक कल्याण समिति, सुदामानगर से 1979 में 8,051 रुपए में 889 वर्गफीट का प्लॉट (नंबर 813) खरीदा था। तब कॉलोनी वैध नहीं थी इसलिए प्लॉट की रजिस्ट्री नहीं होती थी।
इस बीच श्रीमती सोलंकी ने मकान बना लिया। 2000 में कॉलोनी वैध हुई तो उन्होंने 29 मई 01 को रजिस्ट्रार कार्यालय में रजिस्ट्री के लिए पेश कर प्लॉट खरीदी की कीमत के आधार पर 770 रुपए स्टाम्प ड्यूटी जमा की। फाइल रजिस्ट्रार के पास पहुंची तो प्लॉट व मकान की कीमत 4.17 लाख से ज्यादा मानी और 39,663 रुपए स्टाम्प ड्यूटी बताई।
कलेक्टर-कमिश्नर और राजस्व मंडल भी गए
रजिस्ट्रार के निर्णय के खिलाफ कलेक्टर के न्यायालय में स्टाम्प ड्यूटी एक्ट की धारा 47-ए के तहत अपील की गई। वहां 8 मार्च 03 को रजिस्ट्रार का फैसला ही सही ठहराया। इसकी अपील संभागायुक्त के समक्ष अपील की गई। वहां भी पूर्व फैसला ही उचित माना गया। राजस्व मंडल, ग्वालियर ने भी 7 जुलाई 05 को वही फैसला कायम रखा।
फिर ली उच्च न्यायालय की शरण
इस पर प्लॉट होल्डर व सोसायटी ने 15 फरवरी 06 को उच्च न्यायालय की शरण ली। वहां दायर याचिका में कहा गया-
- वर्तमान बाजार मूल्य पर स्टाम्प ड्यूटी नहीं ली जाए।
- कलेक्टर द्वारा तय गाइड लाइन अवैध है। उन्हें अधिकार ही नहीं।
- गाइड लाइन किसी भी संपत्ति की स्टाम्प ड्यूटी तय करने का आधार नहीं हो सकती।
- मकान खरीदार ने बनाया है तो वह रजिस्ट्री का हिस्सा नहीं हो सकता क्योंकि रजिस्ट्री केवल प्लॉट की हुई थी।
- सोसायटी से जिस दर पर प्लॉट खरीदे गए, उनमें से कुछ सदस्यों को उसी दर पर रजिस्ट्री की गई तो इन्हें क्यों नहीं?
फैसले के प्रमुख बिंदू
अधिवक्ता श्री यादव के मुताबिक हाईकोर्ट ने निर्देश दिए प्लॉट का बाजार मूल्य वही होगा जो सोसायटी ने सदस्य से वसूला। जब मकान सदस्य ने ही बनाया तो ड्यूटी कैसी। कुछ सदस्यों को पुरानी दर पर रजिस्ट्री की गई तो इस सदस्य की क्यों नहीं। इस मामले में कलेक्टर 25 फरवरी 08 को फिर से दर तय करें।