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Madhya Pradesh
Gwalior Gwalior ग्वालियर.
गांवों में असरदार लोग सरकारी योजनाओं का उपयोग किस तरह से करते हैं, इसका खुलासा ग्राम जमाहर की पंचायत पर गुरुवार को कलेक्टर राकेश श्रीवास्तव और जिला पंचायत के सीईओ विनोद शर्मा के सामने उस समय हुआ जब गांव के ही कुछ लोगों ने पेयजल संकट की जानकारी देते हुए इस बात की शिकायत की कि सरकारी हैण्ड पंपों में कुछ लोगों ने निजी मोटर लगा ली है।
पंचायत भवन के चबूतरे पर बैठकर अधिकारी जब गांव वालों की समस्याओं का निराकरण करने के लिए मौके पर मौजूद विभिन्न विभागों के अधिकारियों को दिशा निर्देश देने में लगे थे, तभी पीएचई से जुड़ी समस्याओं की बारी आई। जिला पंचायत सीईओ ने पूछा गांव में कितने हैण्डपंप हैं और उनमें से कितने चालू हैं? इस पर लोगों ने बाताया कि 22 हैण्डपंप हैं, इनमें से 15 खराब हैं। इस पर पीएचई के कर्मचारी के साथ-साथ सीईओ जनपद मुरार ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि सिर्फ दो हैण्डपंप खराब हैं।
इतना सुनते ही कई लोगों ने एक साथ शिकायत करते हुए कहा कि जिन लोगों के दरवाजे पर सरकारी हैण्डपंप लगे हैं, उन्होंने उनमें निजी मोटर लगवा ली है और वे दूसरों को पानी नहीं भरने देते हैं। इस पर कलेक्टर और सीईओ जिला पंचायत चौंके। उन्होंने पूछा- नाम बताएं, किसने किया है ऐसा? इस पर एक गांव वाले ने कहा- खुद सरपंच साहब ने। सरपंच, अधिकारियों के सामने ही बैठा था. उसने कहा मैंने क्या अकेले ऐसा किया है ? इस पर ग्रामीणों ने एक जनपद सदस्य सहित चार अन्य लोगों के नाम गिना दिये।
इस सबके बाद जिला पंचायत सीईओ ने मौके पर मौजूद पीएचई के अधिकारियों को डांट लगाई और सब इंजीनियर अरविन्द शर्मा को तलब किया। इसके बाद तुरन्त सरकारी हैण्डपंपों में लगी निजी मोटरें निकलवाने और जरूरत पड़ने पर संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई करवाने के निर्देश दिये। उन्होंने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि पीएचई अमले के देखते हुए इस तरह का काम कैसे हुआ?