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पुरखौती और सरोवर का काम ठप

रायपुर. पुरखौती मुक्तांगन में करीब दो साल में तीन करोड़ और विवेकानंद सरोवर पर पांच करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं, लेकिन अब फंड की समस्या ने दोनों कामों को ठप कर दिया है। प्रदेश के पर्यटन व संस्कृति मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने इन दोनों ही उद्यानों की कल्पना की और उसे मूर्त रूप देने का बीड़ा उठाया। दो साल पहले तत्कालीन राष्ट्रपति डा. एपीजे अब्दुल कलाम ने पुरखौती मुक्तांगन की नीव रखी।

प्रदेश में अपने तरीके की अनोखी इस योजना पर 198 एकड़ जमीन पर 101 करोड़ रुपए खर्च होने हैं। विभागीय सूत्रों के मुताबिक तीन करोड़ रुपए खर्च करते तक ही संस्कृति विभाग की सांसें फूल गईं। यहां दो ठेकेदारों को उद्यान बनाने का जिम्मा दिया गया।

30 लाख का बिल अटका तो ठेकेदारों ने काम समेट लिया। पुरखौती मुक्तांगन चार माह से वीरान पड़ा है। जो काम हुए वो भी जर्जर होने लगे हैं। इसके बावजूद छुट्टी के दिनों में यहां सैकड़ों लोगों की भीड़ जुटती है। वहां न केंटीन है न ही पार्किग की व्यवस्था। पीने को पानी व सुरक्षा का भी कोई इंतजाम नहीं।

फंड मिलने का इंतजार

संस्कृति विभाग के संचालक राकेश चतुर्वेदी का कहना है कि इस वित्तीय वर्ष में दो करोड़ रुपए मिले थे। पहले चरण का काम पूरा हो चुका है। 27 जनवरी को योजना की सलाहकार समिति की बैठक है। बैठक में फैसले के आधार पर दूसरे चरण का काम होगा। उन्होंने बताया कि दूसरे चरण के काम के लिए 70 लाख रुपए बचे हैं। प्रस्तावों को मंजूरी मिलते ही पुरखौती मुक्तांगन का काम तेज होगा।

बिन बिजली सरोवर सून

विवेकानंद सरोवर के सौंदर्यीकरण का काम भी ठप है। यहां 12 करोड़ रुपए खर्च होने थे। करीब पांच करोड़ खर्च हो चुके हैं। वाटरवाल, म्यूजिकल फाउंटेन के अलावा लान और बैठने की व्यवस्था दुरुस्त कर ली गई है। लेजर शो में 300 लोगों के बैठने के लिए गैलरी व लाइट एंड साउंड सिस्टम पर कोई काम नहीं हो सका है।

गौरतलब है कि बिजली कनेक्शन के अभाव में वाटरवाल, म्यूजिकल फाउंटेन बंद है। यहां नगर निगम पर्यटन विभाग को बिजली नहीं दे रहा है। राज्योत्सव के दौरान दो दिन के लिए बिजली मिली थी। नया कनेक्शन लेने पर्यटन विभाग ने डिपाजिट जमा नहीं किया है।

नेताओं में विवाद

एक समय पर्यटन मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ही सर्वेसर्वा थे। सरकार ने पर्यटन बोर्ड में अध्यक्ष के पद पर संतोष बाफना की नियुक्ति कर दी। कुछ माह के भीतर ही दोनों नेताओं में विवाद खुलकर सामने आने लगे। सूत्रों का दावा है कि पर्यटन योजनाओं पर काम रुकने का मुख्य कारण नेताओं के बीच विवाद ही है।

पर्यटन विभाग की तमाम योजनाओं का यही हश्र है। संतोष बाफना का कहना है कि विवेकानंद सरोवर का काम चल रहा है। हो सकता है ठेकेदार बाहर गया हो। उन्होंने योजना को लेकर किसी तरह के विवाद या मतभेद से इंकार किया।





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