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तेंदुए को घेरकर मार डाला

अजमेर /श्रीनगर. श्रीनगर के पास नारगाल गांव के लोगों ने गुरुवार शाम एक तेंदुए को घेर कर लाठियों से मार डाला। इससे पहले बुधवार रात तेंदुए ने मकान में सो रही वृद्धा को जख्मी कर दिया और दो बकरियों की जान ले ली। रातभर दहशत में रहने के बाद ग्रामीण तड़के ही तेंदुए की तलाश में निकल पड़े। ग्रामीणों ने तेंदुए को मौत के घाट उतारने के बाद शव दफना दिया था, जिसे बाद में वनकर्मियों ने कब्जे में ले लिया।

श्रीनगर के बांदड़ा पहाड़ी इलाके में बुधवार को तेंदुआ आबादी क्षेत्र में आ गया था। गांव वालों से घिर जाने पर वह पहाड़ी की चट्टानों के पीछे दुबक गया। करीब ढाई घंटे तक लोगों ने उसे घेरे रखा। बाद में पुलिस ने मौके पर पहुंच कर लोगों को हटाया। इस बीच, तेंदुआ जंगल की तरफ भाग गया। रात करीब साढ़े बारह बजे तेंदुआ नारगाल गांव में बोदूसिंह रावत के मकान में घुस गया, मकान में दरवाजा नहीं था। तेंदुए ने रजाई ओढ़ कर सो रही बोदू की पत्नी केसी देवी (70) पर हमला कर दिया।

केसी की चीख सुनकर दूसरे कमरे में सो रहा उसका पुत्र पेमा और अन्य घरवाले जाग गए, उन्होंने लाठी से हमला कर तेंदुए को भगाया। केसी देवी के कंधे पर जख्म हुआ है। इसके बाद तेंदुए ने पास स्थित भगवानी देवी के मकान में घुसकर दो बकरियों को मार दिया। मकान में सुखबीर सिंह, लक्ष्मी, मनभर, बरजी देवी और ममता भी फर्श पर सो रहे थे। बकरियों की आवाज से वे जाग गए।

उन्होंने बताया कि बकरियां खूंटे से बंधी होने के कारण तेंदुआ उन्हें घसीट कर नहीं ले जा सका। पेमासिंह और गांव के अन्य लोगों ने घटना की जानकारी श्रीनगर पुलिस को दी। रातभर भयभीत के बाद गांव के लोग लाठी-सरिये लेकर तेंदुए की तलाश में जुट गए। गुरुवार शाम लोगों ने जंगल में तेंदुए को घेर लिया और लाठियों से पीट-पीट कर मार डाला।

पुलिस के डर से दफनाया

गांव के लोगों ने पुलिस कार्रवाई के डर से तेंदुए को दफना दिया था। ग्रामीणों की सूचना पर वनकर्मियों ने गड्ढा खोद कर तेंदुए का शव निकाला। मंडल वन अधिकारी प्रियरंजन भी मौके पर पहुंच गए। तेंदुए का शव बीर के डाक बंगले में रखवाया गया है। पोस्टमार्टम शुक्रवार को होगा।

वन विभाग ने बताया था जरख

बांगड़ गांव में बुधवार शाम लोगों ने तेंदुए का घेर लिया था। सूचना मिलने के बावजूद वन विभाग ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। अफसरों ने जरख या अन्य जानवर होने का दावा कर ग्रामीणों को शांत कर दिया।

लोगों ने पुलिस और वन विभाग के अफसरों को सूचित किया था कि तेंदुआ आबादी इलाके में घुसकर लोगों के लिए खतरा बन सकता है। लेकिन वन विभाग के कर्मचारी उस समय मौके पर पहुंचे, जब तेंदुआ जंगल में भाग चुका था। लोगों का कहना है कि वन कर्मियों ने बुधवार को समय रहते तेंदुए को काबू कर लिया होता तो उसकी जान बच सकती थी।





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