भोपाल.
राजधानी में सोमवार से जारी जलसंकट ने गुरुवार को विकराल रूप ले लिया। अरेरा कालोनी, चार इमली, 74 बंगला, शिवाजी नगर व अन्य क्षेत्रों में लोगों ने निजी टेंकरों से पानी खरीदा। नगर निगम के टैंकर भी दिनभर इधर-उधर पानी पहुंचाते रहे। शुक्रवार को भी कई क्षेत्रों में पानी कम दबाव से मिलेगा।
कोलार में फ्लोमीटर लगाने के लिए पंप बंद करने से राजधानी में पैदा हुए जलसंकट का प्रबंधन करने में नगर निगम प्रशासन नाकाम साबित हो गया। निगम प्रशासन का दावा था कि गुरुवार को जलप्रदाय व्यवस्था पूरी तरह बहाल हो जाएगी, लेकिन सच्चाई यह है कि शुक्रवार को भी कोलार से सप्लाई वाले अंतिम छोर पर पानी कम दबाव से मिलेगा। गुरुवार को भी जब नलों में पानी नहीं आया, तो लोगों के पास पानी और टैंकर के लिए इधर- उधर भटकने के अलावा दूसरा कोई चारा नहीं था।
दोपहर में भी लोग अपने वाहनों से पानी ढोते हुए नजर आए। लोगों की शिकायत थी कि नगर निगम में फोन करने पर भी घंटों टैंकर नहीं आया। मजबूरीवश निजी टैंकर बुलवाना पड़ा। अक्सर दो सौ से तीन सौ रुपए में मिल जाने वाले निजी टैंकर के पांच सौ रुपए देना पड़े।
मंत्रियों, अफसरों के घर टैंकर
जलसंकट से प्रदेश सरकार के मंत्री और आला-अफसर भी अछूते नहीं रहे। कई मंत्रियों और अफसरों के बंगलों पर नगर निगम ने टैंकर से जलापूर्ति की। नगर निगम के काल सेंटर पर टैंकरों की मांग के लिए फोन आते रहे।