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भारत का एक नया चेहरा बनतीं आज की आधुनिक महिलाएं

इस वर्ष भारत को गणतंत्र घोषित हुए 58 साल हो जाएंगे। आज जब हम 26 जनवरी को एक और गणतंत्र दिवस मनाने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आज भारतीय नारी का लोकतांत्रिक भारत में दर्जा क्या है और उसके समक्ष किस प्रकार की चुनौतियां हैं। इसकी आवश्यकता इसलिए और भी बढ़ जाती है, क्योंकि भारतीय संविधान द्वारा महिलाओं को बराबरी का दर्जा दिया गया है।

एक तस्वीर तो यह बताती है कि देश के बड़े महानगरों में भी आधी दुनिया सुरक्षित नहीं है। पिछले दिनों देश के विभिन्न शहरों में महिलाओं के साथ हुई छेड़-छाड़ और हिंसा की घटनाओं से यह तस्वीर उभरती है, जो बताती है कि सभ्यता और विकास के पर्याय माने जाने वाले शहरों में भी महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं।

अगर स्वतंत्रता के बाद के परिदृश्य पर नजर डालें तो पता चलता है कि उस दौर में भारतीय महिला की शिक्षा-दीक्षा से लेकर अन्य सभी तैयारियां उसके सफल वैवाहिक जीवन और पारिवारिक जिम्मेदारियों को केंद्र में रखकर ही की जाती थीं। विवाह का अर्थ पुरुष द्वारा एक महिला को जीवनर्पयत प्रदान की गई सुरक्षा से था।

लोगों का मानना था कि महिलाएं बगैर किसी पुरुष के संरक्षण के सुरक्षित नहीं रह सकतीं। यही वजह है कि वह पहले पिता, फिर पति और बाद में बच्चों पर आश्रित मानी जाती थी। उस दौर में लड़कियों के माता-पिता उनके जन्म के समय से ही उनकी शादी के लिए बचत करने में लग जाते थे।

आज भी ये सारी बातें समाज के कई वर्गो में विभिन्न रूपों में विद्यमान हैं। इसके बावजूद धीरे-धीरे ही सही, पर महिलाओं के प्रति समाज के नजरिये में परिवर्तन आ रहा है। आज बहुत से माता-पिता अपनी बच्चियों को अपने पैरों पर खड़ा देखना चाहते हैं। वे अपनी लड़कियों को दहेज के दंश और विवाह की असुरक्षा से बचाने लिए तैयार कर रहे हैं।

आज अध्यापक छात्राओं को उनकी क्षमताओं के प्रति जागरूक बनाकर उन्हें अपने पैरों पर खड़ा होने में मदद कर रहे हैं। आज ग्रेजुएट और पोस्ट-ग्रेजुएट के पाठ्यक्रमों में वर्तमान समय की मांग के अनुरूप अधिक से अधिक व्यावसायिक डिग्रियों को शामिल किया जा रहा है। आज बहुत से शिक्षण संस्थान लड़कियों को मजबूत बनाने के लिए जागरूकता कार्यक्रम चला रहे हैं। मीडिया भी जागरूकता फैलाने में अहम भूमिका निभा रहा है और उसने महिलाओं से संबंधित मुद्दों को अपने एजेंडे में प्रमुखता से शामिल किया है।

कानून बनाने और उसे लागू करने वाली संस्थाओं ने भी महिलाओं से संबंधित मुद्दों पर ध्यान देना शुरू कर दिया है। महिला लेखकों, महिलाओं से संबंधित पत्रिकाओं और राष्ट्रीय दैनिकों में महिलाओं से संबंधित मुद्दों पर पेजों की बढ़ती संख्या से क्रिएटिव राइटिंग का क्षेत्र उन्हें समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण साबित हुआ है। आज महिलाएं पत्रकारिता के प्रिंट और दृश्य माध्यमों में लीड कर रही हैं।

कह सकते हैं कि समय के साथ-साथ महिलाओं ने अपने को काफी बदला है और अपनी मेधा के बल पर लगातार अपने लिए स्थान तलाश रही हैं। स्कूल और कॉलेजों में यह बदलाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। आज की लड़की अपनी ताकत और क्षमता को भलीभांति जानती है। अपने रोल मॉडलों की तरह वह भी सफल होना चाहती है। पहले की तुलना में आज की महिला अधिक जागरूक है।

वह इस बात के लिए तैयार नहीं है कि उसे यह बताया जाए कि उसे क्या करना है? उसे पता है कि वह क्या चाहती है और उसे प्राप्त करने के लिए वह प्रयास भी कर रही है। वह बदलते देश-समाज में अपनी भूमिका को पहचान रही है और उसे अपना भी रही है। पहले की तुलना में आज महिलाओं के लिए काफी अवसर हैं। आज कोई भी प्रोफेशन उनकी पहुंच से बाहर नहीं है। आज की महिला

बिना किसी सहारे के अपनी योग्यता के बल पर आगे आ रही हैं। विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ती महिलाएं ही इस देश का नया चेहरा हैं। आज की महिला विवाह को सिर्फ सुरक्षा के लिए अपनाने को तैयार नहीं है। वह अब शादी को परस्पर समर्पण व बराबरी के दर्जे के तौर पर देखती है। आज समाज और परिवार में परंपरा सेचली आ रही पुरुषों की प्रधानता और वरीयता को महिलाएं चुनौती दे रही हैं।

ऐसे में समाज में दो तरह की घटनाओं में तेजी से हुई वृद्धि को देख कतई आश्चर्य नहीं होता- पहला, तलाक की घटनाएं बढ़ी हैं, क्योंकि अब महिलाएं अपमान और अपने ऊपर होने वाले अत्याचारों को सहने के लिए तैयार नहीं हैं। दूसरा, महिलाओं के लिए विवाह जीवन का अंतिम सच भर नहीं रह गया है।

इसका आशय यह है कि देर से शादी या अकेले रहने को प्राथमिकता आज की महिलाओं के लिए बेहतर विकल्प बन चुके हैं। आज महिलाएं छोटे परिवार को ध्यान में रखकर मातृत्व की योजना बना रही हैं। आज महिलाओं का यह सौभाग्य है कि उनके पास पुरुषों के समान ही दायित्व हैं कि नए भारत के निर्माण में और भारत को मानवता का सुपर पावर बनाने में वे अपनी शक्ति लगाएं। यही है आज की भारतीय नारी।

लेखिका भूतपूर्व आईपीएस अधिकारी हैं।





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