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53 और एचसीएस संदेह के दायरे में

चंडीगढ़ एचसीएस 2002 बैच के 10 कैंडिडेट्स की पोल तो खुल ही गई है अब बाकी 53 एचसीएस भी संदेह के दायरे में आ गए हैं। हाईकोर्ट ने हरियाणा पब्लिक सर्विस कमीशन से तीन दिन के भीतर इन अफसरों की भर्ती का रिकॉर्ड भी हाईकोर्ट में पेश करने को कहा है। इससे पूरे बैच के अफसरों में हड़कंप मच गया है।

इस बैच में भर्ती हुए अफसरों में से टॉप टेन लिस्ट के कैंडिडेट्स और रिजेक्टेड 13 कैंडिडेट्स की चयन प्रक्रिया से संबंधित रिकॉर्ड की जांच रिपोर्ट वीरवार को हाईकोर्ट में सीनियर एडवोकेट मोहन जैन ने पेश की। जांच के दौरान पाई गई गड़बड़ियों को ब्यौरेवार कोर्ट के सामने रखा गया। अगली सुनवाई 12 फरवरी को होगी।

मामले की सुनवाई कर रहे चीफ जस्टिस विजेंद्र कुमार जैन और जस्टिस केएस आहलूवालिया की बेंच ने 10 सिलेक्ट और 13 रिजेक्टेड उम्मीदवारों का रिकॉर्ड वापिस देने की एचपीएससी की मांग खारिज कर दी। यह रिकॉर्ड कोर्ट के आगामी आदेशों तक कोर्ट के पास ही रहेगा।

जांच रिपोर्ट में पाई गई खामियां हाईकोर्ट को सौंपी 9 पेज की रिपोर्ट में कुछ सेलेक्टेड कैंडिडेट्स की आंसर शीट में जबर्दस्त खामियां मिली हैं।

5वीं रैंक हासिल करने वाले कुलधीर सिंह को हिस्ट्री के पेपर में 5 क्वेश्चंस के मार्क्‍स दिए गए, जबकि उसने केवल 4 क्वेश्चंस ही सॉल्व किए थे। उसके हिंदी के पेपर में भी ओवरराइटिंग कर मार्क्‍स बढ़ाए गए।

एक अन्य सेलेक्टेड कैंडिडेट जगदीप ने भूगोल के केवल 4 क्वेश्चंस ही सॉल्व किए जबकि नंबर 5 क्वेशचंसं के दिए गए हैं।

सुरेंद्र कुमार की आंसर शीट में कांटछांट कर मार्क्‍स बढ़ाए हुए थे। कई सवालों में काफी कटिंग पाई गई। इसी तरह एक अन्य सेलेक्टेड कैंडिडेट सरिता मलिक की आंसर शीट में भी कटिंग पाई गई हैं।

कमलेशर कुमार (रोल नंबर 5563) की आंसर शीट में कांटछांट कर अंग्रेजी में नंबर बढ़ाए गए। इसके अलावा वीना हुड्डा (रोल नंबर 17255) की आंसर शीट में कांटछाट कर नंबर बढाए गए। कई उम्मीदवारों की आंसर शीट्सं में हैंडराईटिंग में भी असमानताएं पाई गई हैं।

-रिपोर्ट में मनीष नागपाल (रोल नंबर 7824) के हिंदी के पेपर में लिखे निबंध में काफी कटिंग पाई गई, उनके प्रश्न नंबर 11 के नंबर बढ़ाए गए ।

-वत्सल वशिष्ठ (रोल नंबर 17246) के अंग्रेजी के पेपर में कटिंग पाई गई और उसके प्रश्न नंबर 3 के नंबर बढाए गए थे।

- रिजेक्ट होने वाले उम्मीदवारों रोल नंबर 8055, 7922, 6943, 6317, 14539, 8577 के मार्क्‍स में अलग स्याही से कटौती पाई गई है।

तीन दिन चली थी जांच-

हाईकोर्ट द्वारा 14 जनवरी को दिए आदेशों के बाद यह जांच की गई थी। जांच हाईकोर्ट के ज्वाइंट रजिस्ट्रार (ज्युडिशियल) की देखरेख में हुई। जांच के दौरान एचपीएससी के सैक्रेट्री ललित सिवाच, याचिकाकर्ता करन दलाल के वकील मोहन जैन और एडिशनल एडवोकेट जनरल संजीव बंसल मौजूद थे।

पहले भी चैक हो चुका है रिकॉर्ड :

हरियाणा में इससे पहले 1993 में भर्ती एचसीएस के बैच की भर्ती प्रकिया भी विवादों में आई थी। उस वक्त हाईकोर्ट के जस्टिस सिंघवी ने सेलेक्टेड कैंडिडेट्स की आंसर शीट्स की जांच की थी। हालांकि उस वक्त इनमें किसी प्रकार की कांटछाट नहीं मिली थी। लेकिन उस मामले में हाईकोर्ट ने भविष्य में एचपीएससी की आंसर शीट्स पर इनविजिलेटर के साइन और नंबरिंग करने के निर्देश दिए थे।





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