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इंग्लिश का पेपर, 80 में से जीरो

चंडीगढ़ पीयू के इवनिंग स्ट्डीज डिपार्टमेंट में इंग्लिश की स्टूडेंट पूजा पुरी ने पिछले साल अप्रैल में एमए इंग्लिश के एग्जाम दिए। 26 जून 2007 को रिजल्ट आने पर पूजा हैरान रह गई क्योंकि उसके ब्रिटिश ल्रिटेचर के थर्ड पेपर में जीरो नंबर थे।

डिटेल मार्कशीट देखने पर वह और भी हैरान रह गई क्योंकि ल्रिटेचर के पेपर में तो उसके 80 में से जीरो नंबर आए थे, लेकिन इंटरनल असेस्मेंट में 20 में से 14 नंबर आए।

पूजा ने शिकायत पीयू अथॉरिटी से की लेकिन रास्ता नहीं निकला। पूजा ने 2 जुलाई को री-चैकिंग और रीवैल्यूएशन के लिए फॉर्म भरे। 10 अगस्त को री-चैकिंग का रिजल्ट आया तो उसमें भी पहले की तरह जीरो नंबर ही आए। नवंबर में रीवैल्यूएशन का रिजल्ट आया तो उसमें एक एग्जामिनर ने उसी पेपर में 21 और दूसरे एग्जामिनर ने 16 नंबर दे रखे थे।

पूजा की शिकायत पर पीयू अथॉरिटी ने कमेटी गठित कर दी। इस दौरान पूजा ने पीयू अथॉरिटी को दिए एफिडेविट में कहा कि उसका पेपर बहुत बढ़िया हुआ है लेकिन फिर भी उसे जीरो नंबर दिए गए। पूजा ने इस मामले में आरोप लगाया है कि जानबूझकर उसको जीरो नंबर दिए गए हैं। अब इस मसले पर गठित कमेटी को अपनी रिपोर्ट पीयू के वीसी को सौंपनी हैं।

पहले भी हुए हैं ऐसे मामले

पीयू में स्टूडेंट्स को गलत नंबर देने के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। इससे पहले पीयू के हिस्ट्री डिपार्टमेंट में स्टूडेंट को जीरो नंबर दिए गए थे। उससे पहले यूबीएस में एक स्टूडेंट ने आंसर शीट पर कुछ धार्मिक शब्द लिखे तो उसे ज्यादा नंबर दे दिए गए।

क्यों निकाला रिजल्ट लेट?

पूजा पुरी ने 2 जुलाई को री-चेकिंग और रीवैल्यूएशन फॉर्म भरे लेकिन री-चेकिंग का रिजल्ट 10 अगस्त को निकला, जबकि नियमों के मुताबिक यह रिजल्ट 7 दिनों के अंदर निकाला जाना चाहिए। इसी तरह रीवैल्यूएशन का रिजल्ट 45 दिनों में निकलता है लेकिन पूजा का यह रिजल्ट भी 3 माह बाद नवंबर में निकाला गया।

जीरो नंबर क्यों? इस बार बेशक स्टूडेंट के रीवैल्यूएशन में बाकी दो एग्जामिनर्स ने 21 और 16 नंबर दे दिए हों और स्टूडेंट फिर भी पास न हो, लेकिन पीयू के सीनियर टीचर्स का मानना है कि जीरो नंबर देने का कोई मतलब नहीं। इन टीचर्स का कहना है कि यही स्टूडेंट रीवैल्यूएशन में पास होती तो क्या गलती नहीं मानी जाती। पहले एग्जामिनर की गलती तो है ही।

स्टूडेंट ने क्वेश्चन पेपर में दी गई कोटेशन बार-बार लिखी थी। मैंने पेपर मार्क कर दिया और इस मामले की इन्क्वायरी चल रही है। वैसे भी रीवैल्यूएशन में यह स्टूडेंट फेल है। मैंने स्पॉट इवैल्यूएशन की थी और उस वक्त यह पता नहीं होता कि पेपर किसका है, तो ऐसे में जानबूझकर जीरो नंबर देने का सवाल ही पैदा नहीं होता।

-एसएस गिल, रीडर और एग्जामिनर, इवनिंग स्टडीज, पीयू





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