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कला-उद्योग जगत सुर में

मुंबई. गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर हुई पद्म सम्मानों की घोषणा से साफ हो गया है कि उद्योग और कला जगत हिंदोस्तान की महत्वपूर्ण पूंजी हैं क्योंकि कुल 119 शख्सियतों में से कला क्षेत्र की 28 और उद्योग जगत की दस हस्तियां चुनी गई हैं।

भारत का दूसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान पद्म विभूषण कला के क्षेत्र में मशहूर गायिका आशा भोसले को दिया गया है जबकि इस सम्मान के लिए उद्योग जगत की चार हस्तियों को चुना गया है, स्टील किंग एलएन मित्तल, एनआर नारायणमूर्ति, पीआरएस ओबेरॉय और इस साल सुर्खियों में लगातार रहे रतन टाटा।

पद्मभूषण के लिए दोनों ही क्षेत्रों से पांच-पांच हस्तियां चुनी गई हैं। वहीं, पद्मश्री के लिए कला क्षेत्र से 22 हस्तियों का नाम चुना गया है और उद्योग जगत से एक।

इसका सीधा सा मतलब यह है कि इन दोनों क्षेत्रों में भारत को अद्वितीय उपलब्धियों के साथ ही सम्मान भी मिल रहा है। लेकिन उद्योग जगत से चुने गए नामों पर नजर डालें तो साफ है कि अधिकांश नाम वे हैं जिनके कारण भारत का वर्तमान व्यापार-उद्योग परिदृश्य निर्मित हो रहा है या विकास कर रहा है।

इससे उलट स्थिति यह है कि कला क्षेत्र से जो नाम चुने गए हैं, उनमें से कुछ सीमित पहचान वाले हैं और कुछ को आदरांजलि स्वरूप इन सम्मानों से नवाजने का प्रयास है। कला क्षेत्र से चुने गए नामों का वर्तमान कला परिदृश्य में कोई महत्वपूर्ण उल्लेख नहीं है। सिर्फ कुछ ही व्यक्तित्व चर्चा में हैं और सक्रिय भी।

खेल जगत से पांच नाम चुने गए हैं जिनमें से तीन को पद्म विभूषण और दो को पद्मश्री से नवाजा जाना है। माना जा सकता है कि इस क्षेत्र में भी भारत का विकास और बोलबाला काबिले-गौर है।





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