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गौरवशाली लोकतंत्र के युवा सारथी

२६ जनवरी पर विशेष.नियती से किया हुआ वादा जब सच हुआ और आजादी के पंख लिए एक गौरवशाली भारतीय लोकतंत्र की यात्रा के छह दशक उस सुनहरें सपने की अभिव्यक्ति है। नियती से किया हुआ हर वादा सौ करोड़ भारतीयों ने सच किया है और पूरे दिल से जम्मू से कन्याकुमारी तक हर भारतीय देश की एकता अंखडता और उसके स्वाभिमान की रक्षा के लिए तत्पर है।

अपनी एकता, अखंडता और सांस्कृ तिक व नैतिक मूल्यों को सहेजकर पूरी हुई लगभग ६ दशकों की यात्रा में भारत के लोकतंत्र ने संपूर्ण दुनिया के समक्ष एक आदर्श प्रस्तुत किया है। हालांकि इस यात्रा के दौरान ऐसे कई मुकाम आए जब हमारे लोकतंत्र पर संकट के बादल छाए लेकिन हर बार हमने अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति व आत्मविश्वास के बल पर न सिर्फ लोकतंत्र विरोधी ताकतों को हराया बल्कि और अधिक मजबूती के साथ अपने आपको स्थापित किया।

54 फीसदी से अधिक युवाओं वाले देश में आज भले ही आजादी की लड़ाई के मूल्य तनिक धुंधले दिखलाई पड़ते हो तथा बदलते दौर में राष्ट्रीय पर्व महज औपचारिकता बनकर रह गए हो लेकिन सच तो यह है कि हमारी युवा शक्ति आज भी अपने देश को उसी जज्बे से प्यार करती है जिसका सपना हमारे नायकों ने देखा था। आजादी की जंग में अपना सर्वस्व निछावर करने वाले नौजवानों का सपना आज भी हम अपनी मौजूदा युवा पीढ़ी की आंखों में देख सकते हैं।

यह सही है कि आज हमारा प्रशासनिक व राजनैतिक तंत्र लगभग संवेदनाहीन की स्थिती में पहुंच गया है इसके बावजूद देश के नागरिकों का संविधान में विश्वास बना हुआ है। यह संविधान में विश्वास का ही परिणाम है कि नैना साहनी व जाहिरा शेख जैसे मामलों में अंतत: गुनाहगारों को सजा प्राप्त हुई।

आज हम हर क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहे है, युवा उद्यमियो, कलाकारों, खिलाड़ियों आदि ने अपने बेहतरीन प्रदर्शन के बल पर संपूर्ण विश्व को अचंभित कर दिया है। यही कारण है कि सांप, साधू व सपेरों से पहचाने जाने वाला हमारा देश दुनिया के सामने एक तेजी से बढ़ते हुए प्रगतिशील व आर्थिक महाशक्ति के रूप में उभरकर सामने आया है।

भारी तादाद में युवाओं से सुसज्जित देश अपनी आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए अब किसी भी सीमा को तोड़ने के लिए तत्पर है। हमारे सामने एक प्रयोगधर्मी और प्रगतिशील पीढ़ी खड़ी है जिस पर सारी दुनिया विस्मित है। आज हमारे देश की तरफ संसार बड़ी उम्मीद से देख रहा है और हम जिस तेज गति से विकासमान है उसे देखते हुए यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी जब विकसित राष्ट्रो में शुमार होंगे ।

संविधान लागू होने के ५८ वर्षो के बाद भी हमारे सामने कुछ ऐसी समस्यायें मुंह उठाए खडी हैं जो हमारे लोकतंत्र के विपरीत हैं तथा इसे कमजोर करने को आतुर हैं। कई स्तरों पर विभाजित समाज में भाषा, जाति, धर्म और प्रांतवाद की तमाम दीवारें हैं जिनमें से कई का निमार्ण तो हमने स्वयं ही किया है। वर्तमान में हमारे सामने वहीं सवाल मुंह उठाए खड़े हैं, जिनके चलते देश का बटवारा हुआ था और महात्मा गांधी जैसी विभूतियां भी इस बटवारे को रोक नहीं पाई। देश के अनेक हिस्सों में चल रहे अतिवादी आंदोलन चाहे वो किसी भी नाम से चलाये जा रहे हो अथवा किसी भी विचारधारा से प्रेरित हो सबका उद्देशय भारत की प्रगति मार्ग में रोड़े अटकाना ही है। हमें इन चुनोतियों का सामना मिलजुल कर करना होगा और बदलाव की उम्मीद 54 फीसदी युवाओं से करनी ही होगी । वक्त पुकार रहा है एक ऐसे सपने को साकार करने का जो हम सबका हक है और देश के अमन चैन को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों को जबाब देना ही होगा ।

लोकतंत्र को सार्थक करने के लिए हमें साधन- संपन्न व हाशिये पर खड़े लोगों को एक स्तर पर देखना होगा, क्योंकि लोकतंत्र तभी सार्थक है जब वह हिंदुस्तान के प्रत्येक व्यक्तियों को समान विकास के अवसर उपलब्ध करवाये। संविधान सभी के लिए समान है यह बात सिर्फ नारों में नहीं व्यवहार में भी दिखनी चाहिए। हमें राम मनोहर लोहिया की यह बात ध्यान रखनी चाहिए की लोकराज लोकचाल से चलता है। महात्मा गांधी ने भी समाज के अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति को भी वही अवसर व सुविधांए प्रदान करने की बात कहीं जो समाज के प्रथम व्यक्ति को प्राप्त है।

हमारी प्रगति व विकास के सूचकांक तभी सार्थक हैं जब वे आम आदमी के चेहरे पर मुस्कान लाने में समर्थ हो। देश के तमाम वंचित लोगों को छोड़कर हम अपने सपनों को सच नहीं कर सकते तो आईये गणतंत्र के इस पावन अवसर पर हम अपने देश को सुदृढ़ करने व विकास की राह पर निरंतर प्रगतिशील रखने की प्रतिज्ञा करें।



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