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इस तरह अस्तित्व में आया संविधान

यूंतो भारतीय संविधान को 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया, लेकिन संविधान सभा के 284 सदस्यों द्वारा इस पर अपने हस्ताक्षर 24 जनवरी 1950 को ही किए गए थे। संविधान निर्माण में दो वर्ष 11 माह और 18 दिन लगे। इस दौरान संविधान सभा के कुल 11 सत्र हुए थे। वैसे पहली संविधान सभा की बैठक 9 दिसंबर 1946 को संसद के संविधान कक्ष में हुई थी। आज इस जगह को संसद के सेंट्रल हॉल के नाम से जाना जाता है।

संविधान सभा की इस बैठक में कई आला हस्तियों ने शिरकत की, जिसमें पंडित जवाहरलाल नेहरू, मौलाना अबुल कलाम आजाद, सरदार वल्लभ भाई पटेल, आचार्य कृपलानी, सरोजनी नायडू और अरुणा आसफ अली पहली पंक्ति में थे। पहली संविधान सभा में 9 महिलाओं समेत 207 प्रतिनिधि शामिल हुए थे।

सभा के उद्घाटन सत्र की शुरुआत सुबह 11 बजे आचार्य कृपलानी द्वारा सभा के अस्थायी अध्यक्ष डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा के परिचय से हुई थी। तत्पश्चात सभी सदस्यों ने रजिस्टर में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। इसके बाद सभा की कार्रवाई समाप्त हो गई थी। इस दौरान डॉ. सिन्हा ने सभी देशों से आए बधाई संदेश पढ़े और एक डिप्टी चेयरमैन को नामांकित किया गया।

इस मौके का आकाशवाणी और दिल्ली ब्रॉडकास्टिंग कापरेरेशन ने प्रसारण भी किया था। भारत के लिखित और विस्तृत संविधान पर 13 दिसंबर 1946 को पंडित नेहरू ने वस्तुनिष्ठ प्रस्ताव पेश किए थे। इसके तहत भारत को आजाद व संप्रभु गणतंत्र घोषित किया गया। माना गया कि सारी रियासतें भारत के अधीन होंगी, न कि ब्रिटिश राज्य या पूर्व सल्तनतों के। साथ ही सभी जगह भारत सरकार के नियम व कानून लागू होंगे।

भारतीय संविधान के तहत सभी को सोचने, बोलने व रहने के समान सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक अधिकार होंगे। अल्पसंख्यकों, पिछड़ा वर्ग और आदिवासी क्षेत्र के लोगों को बराबरी का दर्जा देने की पहल की गई। ऐसे नियम व कानून अमल में लाने की पहल की गई जिससे यह मुल्क पूरी दुनिया में शांति स्थापित करने और मानवजाति की बेहतरी के लिए काम कर सके।





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