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गरीबी का गरीबतंत्र

जोधपुर. गरीबी खत्म कैसे हो, जब आज भी सरकारी रिकॉर्ड में ‘गरीब’ बनने का ख्वाब देखने वालों की संख्या हजारों में है। घर में भले ही हर प्रकार की सुख-सुविधा हो और संपन्नता हो, लेकिन बीपीएल सूची में जगह पाने के लिए अच्छे-खासी माली हालत वाले लोग भी जुगाड़ बिठाने से बाज नहीं आ रहे हैं। जोधपुर जिले में एक-दो नहीं, बल्कि पूरे 9 हजार 339 परिवार किसी तरह ’गरीबी रेखा’ से नीचे जीवन यापन करने वालों की सूची में जगह पाने कामयाब रहे।

प्रशासन ने जब जांच की तो 1997 के मुकाबले 2002 की बीपीएल सूची में गरीबों की संख्या में 194.30 प्रतिशत तक इजाफा पाया गया। अब 2002 की सूची को संशोधित करते हुए इनके नाम काटे जा रहे हैं। ‘गरीबी’ का यह गोरखधंधा इस हद तक परवान चढ़ा हुआ था कि गरीबी उन्मूलन की तमाम योजनाओं के बावजूद जोधपुर जिले में बीपीएल परिवारों की संख्या 35 हजार 695 से बढ़कर 78 हजार 694 हो गई। कुछ पंचायत समितियों में तो 259 प्रतिशत तक वृद्धि पाई गई।

अब क्या होगा

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर राज्य के विभिन्न जिलों में बीपीएल सेंसस-2002 के पुन: सर्वे की प्रक्रिया सतत चलेगी। बीपीएल श्रेणी की योग्यता रखने वाला कोई भी परिवार निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन कर सकता है। जांच में आवेदक को योग्य पाए जाने पर उसके परिवार को बीपीएल श्रेणी में शामिल कर लिया जाएगा। यदि यह पाया गया कि अपात्र इस योजना का लाभ उठा रहा है तो उस परिवार का नाम बीपीएल सूची से हटा दिया जाएगा।

सरकारी योजना का दुरुपयोग

केस-1

जमीन के अलावा घर में पंखे-टीवी की सुविधा। ठीक-ठाक मकान और आजीविका चलाने के लिए हाथ में काम। इसके बावजूद बनाड़ के सदीक बीपीएल श्रेणी में सरकारी सुविधाओं का फायदा उठाते रहे।

फिलहाल : जांच में पकड़े गए। सूची से आउट ।

केस-2

बनाड़ के ही घेवरराम के परिवार के पास

सिर छुपाने के लिए अपने मकान के साथ रेडियो, टीवी व पंखे जैसी जरूरी सुविधाएं हैं। जरूरत की हर सुविधा के बावजूद उन्हें बीपीएल माना गया था।

अब : अब बीपीएल श्रेणी में नहीं रहे।

बीपीएल का लोभ क्यों

बीपीएल सूची में शामिल परिवारों को केंद्र व राज्य सरकार द्वारा समय समय पर विभिन्न सरकारी सुविधाएं व छूट दी जाती हैं।
बीपीएल परिवार को राशन का गेहूं व अन्य खाद्य सामग्री कंट्रोल रेट से कम दाम पर मिलती हैं।
इंदिरा आवास योजना के तहत टोकन मनी पर मकान के साथ सरकारी अस्पतालों व डिस्पेंसरियों में निशुल्क चिकित्सा।
खेतिहर मजदूर को खेती के लिए निशुल्क जमीन।
स्वरोजगार के लिए बैंक से ब्याजमुक्त अथवा न्यूनतम ब्याज दर पर ऋण।
बैंक ऋण पर सब्सिडी का लाभ भी इन्हें मिलता है।

सरकार के निर्देश पर जिले में बीपीएल परिवारों का पुन: सर्वे किया गया। इसमें जो परिवार पात्रता में नहीं पाए गए, उनको पहले सुनवाई का मौका दिया गया। इसके बाद अपात्र लोगों के नाम सूची से काटे गए । ऐसे परिवार जो पहले किसी कारण पात्रता रखते हुए भी बीपीएल सूची में आने से रह गए थे, उनके नाम सूची में जोड़े गए।
—नरेशपाल गंगवार, जिला कलेक्टर, जोधपुर

इसमें कोई दोराय नहीं कि गरीबी कम हुई है। अब केवल आर्थिक विषमता की स्थिति है। इस आधार पर देखें तो हम पाएंगे कि बीपीएल सूची के आंकड़े किसी भी सूरत में विश्वसनीय नहीं कहे जा सकते। बीपीएल में शामिल होने वालों की दरख्वास्तें अब भी बदस्तूर आ रही हैं।
—रूढ़मल शर्मा, विभागाध्यक्ष, बिजनेस एंड फाइनेंस विभाग, जेएनवीयू, जोधपुर





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