बावनगजा(बड़वानी). प्रसिद्ध दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र बावनगजा में 84 फीट की उत्तुंग प्रतिमा के महामस्तकाभिषेक के मनोहारी दृश्य को निहारने हजारों श्रद्धालु जुटे। भगवान आदिनाथ के कलश पर मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने हेलिकॉप्टर से तीन बार पुष्प वर्षा की तो जयघोष से सतपुड़ा की पहाड़ियां गुंजायमान होने लगीं।
16 दिनी महाआयोजन का सबसे महत्वपूर्ण दिन होने से कई संतों व भक्तों की उपस्थिति में सुबह करीब 10.50 बजे प्रथम कलश अमेरिका से आए डॉ. दिलीप बोबरा परिवार ने किया। गंगा, सिंधु, नर्मदा आदि महानदियों के प्रासुक जल, प्रशस्त क्षीर (दूध) व दिव्य केसर से भगवान आदिनाथ की 1008 इंच की उत्तुंग प्रतिमा पर 1008 दिव्य मंगल कलशों से अभिषेक किया गया। जैसे ही प्रथम कलश का पवित्र जल भगवान आदिनाथ के मस्तक पर गिरा तालियों की गड़गड़ाहट व जयघोष से आस्था हिलोरें लेने लगी।
बावनगजा धार्मिक पर्यटन स्थल घोषित : मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने भगवान आदिनाथ की मूर्ति के नीचे बने मंच से बावनगजा को धार्मिक पर्यटन स्थल घोषित किया तो करतल ध्वनि से परिसर गूंज उठा। मुख्यमंत्री ने कहा प्रदेश सरकार का प्रयास रहा कि जनता-जनार्दन को किसी प्रकार की असुविधा न हो, ऐसा हम संतों के प्रताप से कर सके। यदि अनजाने में कोई गलती हुई हो तो सभी संतों से क्षमा मांगता हूं। यहां अध्यात्म व शांति की बरसात होती रहे यही कामना है।
पहला कलश बोबरा व दूसरा मोदी परिवार ने किया :पहला कलश डॉ. दिलीप बोबरा, सुमन बोबरा, सोनल बोबरा, अरविंद, डॉ. वीरेंद्र, अभय बड़जात्या, गुंजलता, डॉ. चंद्रेश पहाड़िया, सुरेश पहाड़िया सभी निवासी अमेरिका तथा राजेंद्र पहाड़िया व अनीता पहाड़िया गंधवानी ने किया। दूसरा कलश भरत मोदी परिवार ने किया। इसके बाद बारी से कई श्रद्धालुओं ने कलश किया।
झूले वाले के लिए बस स्टैंड हटाया : मेले की व्यवस्था के लिए आयोजन समिति की ओर से बावनगजा मेला स्थल मुख्य गेट के पास बड़वानी मार्ग पर बस स्टैंड के लिए जगह निर्धारित की गई थी लेकिन एक मंत्री की सिफारिश के चलते आयोजन समिति ने यह जगह ऐन वक्त पर एक झूले वाले को दे दी। इससे बसों व अन्य चारपहिया वाहनों के खड़े रहने की जगह नहीं बची। कई वाहन सड़क किनारे खड़े करने पड़े। इससे रविवार को सुबह करीब साढ़े दस बजे जाम की स्थिति निर्मित हुई। कई वाहन देर तक फंस रहे। मार्ग पर दिनभर हर दस मिनट में जाम लगता रहा।
देर रात तक चले भजन : शनिवार रात रवींद्र जैन ने भजन प्रस्तुत किए। देर रात तक चले इन भजनों पर लोग खूब झूमे। भजन देखने के लिए पंडाल लोगों से खचाखच भरा था।
सप्तरंगी अभिषेक पंचामृत अभिषेक है : जैन विद्वान डॉ. हेमंत काला (इंदौर) ने बताया सप्तरंगी अभिषेक वास्तव में पंचामृत अभिषेक है। महामस्तकाभिषेक यानी उत्सव जो 12 साल में एक बार होता है।