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ठंड से ठिठका जनजीवन

उदयपुर. playin baby गणतंत्र दिवस व संडे मिलाकर दो दिन शहरवासियों ने आरामतलबी में गुजारे। कड़ाके की ठंड के चलते लोग घरों से निकलने से बचते रहे। छुट्टी के दो दिन लोगों ने देरी से उठने, मन मुताबिक दिनचर्या और गर्म व चटपटे व्यंजनों का स्वाद लिया। शनिवार को दिन में भी जाड़े का जोरदार असर था। धूप में बैठने पर भी धूजणी छूट रही थी और सर्द हवाएं शरीर में सिहरन पैदा कर रही थी।

गणतंत्र दिवस पर गली-मोहल्लों में विभिन्न आयोजन हुए। खेल मैदानों में लोगों ने क्रिकेट-फुटबाल सहित रस्साकशी आदि खेलों का मजा लिया। सामूहिक भोजन से पिकनिक जैसा माहौल रहा और लोगों ने दूध-जलेबी, नमकीन, गाजर का हलवा आदि का लुत्फ उठाया। छब्बीस जनवरी की रात को जाड़े का प्रकोप इस कदर था कि खुले में जाने पर नाक-आंखों से पानी बहने लगा।

वैवाहिक आयोजनों की धूम रहने से शहर में अपेक्षाकृत रौनक थी लेकिन मेहमान प्रीतिभोज में शरीक होकर फटाफट घर पहुंचने की फिराक में रहे। कोहरे के साये में शहर ने अपनी आंखें खोली। जहां दिन में पारा 19.8 डिसे था, वहीं रविवार को दो डिग्री की बढ़ोतरी के बाद तापमान 21.4 डिग्री हो गया। इसके बावजूद दिनभर वातावरण में व्याप्त ठंडक से गलन महसूस होती रही। टंकियों में पानी बर्फ समान ठंडा रहा और गृहिणियों को घर में साफ-सफाई के लिए भी गर्म पानी का इस्तेमाल करना पड़ा।

जू में भी खास जतन

जहां हाड़ कंपा देने वाली सर्दी को देखते हुए लोग बचाव के उपाय कर रहे हैं, वहीं जंतुआलय में जानवरों के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए हैं। गुलाब बाग जंतुआलय के वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी डा.प्रदीप प्रधान ने बताया कि जानवरों को जमीनी ठंड से बचाने के लिए डबल कुशन के घास के गद्दे बिछाए गए हैं। ठंड शुरू होते ही घास के बिछौने लगाए गए थे लेकिन लगातार पड़ रहे जाड़े को देखते हुए इसे डबल लेयर में किया गया है।

पक्षियों के पिंजरों में ग्रीन नेट लगाया है ताकि सर्द हवाओं से प्रोटेक्शन मिल सके। भालू, पैंथर, टाइगर आदि के पिंजरों में गेहूं की बोरियों से वेंटीलेटर को कवर किया जाता है। दिन में धूप आने के लिए इसे हटाते हैं, सांझ होने पर कवर लगाया जाता है। डा.प्रधान ने बताया कि जाड़े के प्रकोप को देखते हुए जानवरों के डाईट में कुछ एडीशन करने की भी प्लानिंग कर रहे हैं।





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