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Madhya Pradesh
Gwalior Gwalior ग्वालियर.
मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, राजस्थान पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स के संयुक्त अभियान को भेदकर अश्विनी भट्ट के अपहरणकर्ता भाग निकले। इनके भागने के बाद एसटीएफ और पुलिस अफसरों ने उन्हें मुरैना जिले के सरायछोला थानाक्षेत्र के जंगलों में एक टपरे (कच्चा मकान) से मुक्त कराया।
आईजी एसटीएफ संजीव कुमार सिंह के मुताबिक 18 जनवरी को निकोलस पीरामल कंपनी के पीथमपुर प्लांट के प्रेसीडेंट अश्विनी भट्ट का अपहरण घाटीगांव और मोहना के बीच हाईवे से कर लिया गया था। तभी से पुलिस और एसटीएफ अपहरणकर्ताओं पर दबाव बना रही थी, इस दबाव के चलते ही मुरैना जिले के सरायछोला थानाक्षेत्र की हद में बदमाश अव्श्रिनी भट्ट और इनकी गाड़ी के ड्राइवर बाबू पटेल को छोड़ भागे।
पुलिस ने उन्हें एक टपरे से मुक्त कराया। इन्हें अपहरण के बाद से यहीं रखा गया था। श्री सिंह के मुताबिक बदमाशों से पुलिस का सामना नहीं हो पाया। पुलिस को उनके ठिकाने के बारे में मालूम चल चुका है, यह सूचना बदमाशों तक भी पहुंच चुकी थी। इसके चलते बदमाश पुलिस के पहुंचने से पहले ही भाग निकले।
पुलिस को बदमाशों की आहट भी नहीं मिल सकी इसलिए पुलिस के जवानों ने गोली भी नहीं चलाई और अश्विनी भट्ट और उनके ड्राइवर को टपरे से निकालकर ले आई। पत्रकार वार्ता के दौरान आईजी ग्वालियर रेंज डीएस सेंगर, आईजी चंबल रेंज अरविंद कुमार, डीआईजी ग्वालियर और चंबल रेंज आदर्श कटियार, डीसी सागर, एसपी ग्वालियर वीके सूर्यवंशी तथा एडीशनल एसपी अतुल सिंह मौजूद थे।
गोली भी चली: श्री भट्ट के मुताबिक उनकी कार को हाईजैक करते समय एक गोली भी चली थी, यह गोली किसी को लगी नहीं। संभवत: इस गोली से ही कार का शीशा टूटा है।
लोग बदलते रहे: श्री भट्ट का अपहरण जिन लोगों ने किया और जिन्होंने उन्हें एक कमरे में बंधक बनाकर रखा वे अलग-अलग थे। बकौल श्री भट्ट जिन लोगों ने उनका अपहरण किया था और जिन्होंने बंधक बनाकर रखा वे अलग-अलग थे। उन्हें खाना खिलाने वाले लोग भी बदलते रहे।
बदमाश कौन थे, कैसे छोड़ा : बदमाश कौन थे और आखिरी बार उन्होंने श्री भट्ट से क्या कहा ? बदमाश आपस में किस इलाके की बोली में बातचीत करते थे ? बातचीत क्या होती थी, इस बारे में श्री भट्ट कुछ बता पाते उससे पहले ही आईजी एसटीएफ संजीव कुमार सिंह ने अश्विनी भट्ट से उठने का इशारा कर दिया।