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राजस्थानी साहित्यकारों को मंच से उतारा

जयपुर. दो मशहूर राजस्थानी साहित्यकारों को रविवार को अपनी ही धरा पर शर्मसार होना पड़ा। यहां डिग्गी पैलेस में ‘जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल’ में साहित्यकार चंद्रप्रकाश देवल और श्रीलाल मोहता को राजस्थानी लोक साहित्य पर चर्चा पूरी किए बिना ही मंच से उतार दिया गया। आयोजन से जुड़ीं अंग्रेजी की मशहूर लेखिका नमिता गोखले दोनों साहित्यकारों पर जमकर बरसीं।

वे इस बात को लेकर गुस्सा थीं कि दोनों तय समय पर कार्यक्रम खत्म नहीं कर रहे हैं, जबकि दोनों साहित्यकारों का कहना था कि मंच देर से मिलने के कारण वे अपनी चर्चा पूरी नहीं कर पा रहे हैं। घटना के समय प्रसिद्ध समाजसेवी स्वामी अग्निवेश और प्रसिद्ध हिंदी कहानीकार चित्रा मुद्गल भी वहां मौजूद थीं।

दरअसल हुआ यह कि ‘जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल’ के आखिरी दिन रविवार सुबह राजस्थानी लोक साहित्य पर चर्चा के लिए देवल और मोहता तो समय पर आ गए, लेकिन उस दौरान वहां अंग्रेजी प्रकाशकों की चर्चा का दौर चल रहा था, जो 20 मिनट देरी से खत्म हुआ। इसके कारण राजस्थानी लोक साहित्य की चर्चा 20 मिनट देरी से चल रही थी।

राजस्थानी लोक साहित्य की चर्चा के बाद हिंदी कहानीकार चित्रा मुद्गल से चर्चा होनी थी और वे कार्यक्रम में आ चुकी थीं। मोहता और देवल जब तक चर्चा को समेटते, तब तक गोखले आपे से बाहर हो र्गई। वे दांत पीसते हुए जोर-जोर से कहने लगीं कि दोनों तत्काल स्टेज से नीचे आएं। इतना सुनने और गोखले के हावभाव को देखकर दोनों तत्काल मंच से उतर गए।

देवल और मोहता वहां चित्रा मुद्गल को सुनने बैठ गए। घटनाक्रम से आहत राजस्थानी साहित्यकार मालचंद तिवाड़ी कार्यक्रम से बाहर चले गए। राजस्थानी साहित्यकारों की यह स्थिति चित्रा मुद्गल के भाषण के दौरान एक बार फिर उभरी। मुद्गल ने कहा, अंग्रेजी के लिए तो यहां बड़ा सभागार रखा गया है, लेकिन हिंदी और राजस्थानी को उपेक्षित करते हुए यह कोना दिया गया है।

रोचक थी लोक साहित्य पर चर्चा

राजस्थानी लोक साहित्य को लेकर चल रही चर्चा इतनी रोचक रही कि डिग्गी पैलेस के प्रांगण में मौजूद स्वामी अग्निवेश भी इसे सुनकर खिंचे चले आए। चित्रा मुद्गल ने भी इस चर्चा में रुचि ली। वे अपने कार्यक्रम के बाद भी लोगों से बातचीत के दौरान राजस्थानी लोक साहित्य तारीफ करती रहीं।

गोखले कौन?

नमिता गोखले अंग्रेजी की उपन्यासकार हैं। उन्होंने ‘पारो : ड्रीम्स ऑव पैशन’, ‘गॉड्स ग्रेव्ज एंड ग्रैंड मदर’ और ‘शकुंतला : द प्ले ऑव मेमोरी’ जैसी पुस्तकें रची हैं। वे पेंग्विन इंडिया के सह-प्रकाशन यात्रा बुक्स की निदेशक हैं। ‘जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल’ में उनकी भूमिका सहयोगी मार्गदर्शक की थी। ये हिंदी-राजस्थानी वाले माइक से चिपक जाते हैं

‘‘ये हिंदी-राजस्थानी वाले माइक से चिपक जाते हैं। इन्हें चुप कराना बड़ा मुश्किल है। अंग्रेजी वाले इस मामले में आर्गेनाइज्ड रहते हैं। वे समय पर बात खत्म कर देते हैं। बीच में रोकने से कोई बुरा माने तो माने, लेकिन मैं तो कई हिंदी लेखकों को स्टेज से उतार चुकी हूं। इनमें अजीतकौर भी एक हैं। —नमिता गोखले, अंग्रेजी लेखिका





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