बीकानेर. जिले के हजारों ग्रामीणों को रोजगार की गारंटी देने वाली योजना के क्रियान्वयन के प्रति सरकारी अधिकारियों की उदासीनता एक बार फिर सामने आ गई है। राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (नरेगा) के पांच वर्षीय प्लान को अनुमोदन करवाने के लिए गणतंत्र दिवस को जिले भर में हुई ग्रामसभाओं में किसी बड़े सरकारी अधिकारी ने भाग नहीं लिया। जबकि ग्रामसभाओं में ग्रामीणों को रोजगार गारंटी योजना की विस्तार से जानकारी दी जानी थी।
अब अधिकारी यह स्पष्टीकरण दे रहे हैं कि ग्रामसेवकों के ग्रामसभाओं के बहिष्कार कार्यक्रम के चलते कंफ्यूजन रहा नहीं तो उनका तो अपने क्षेत्र की पंचायतों में जाने का कार्यक्रम तय था। जिला परिषद के अधिकारियों का कहना है कि ग्रामसेवकों के बहिष्कार कार्यक्रम के कारण ही ग्रामसभाएं 26 जनवरी की बजाय 28 से 30 जनवरी के बीच करने का कार्यक्रम तय किया जा चुका था।
ग्रामसेवक संघ के पदाधिकारियों से बातचीत के बाद पंचायत समितियों ने 26 को ही ग्रामसभाओं का आयोजन करने की व्यवस्था कर दी। बहरहाल शनिवार को कहीं ग्रामसेवकों की अनुपस्थिति से तो कहीं कोरम के अभाव में आमसभाओं का आयोजन नहीं हो सका। किलचू ग्राम पंचायत में ग्रामसेवक आम सभा कराने ही नहीं पहुंचा।
विकास अधिकारी ने उसे फोन कर पंचायत पहुंचने को कहा मगर वह नहीं गया। अब वहां ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान ग्रामसेवक को नहीं हटाया जाता है तब तक वे ग्रामसभा नहीं होने देंगे। कालासर में भी कोरम के अभाव में ग्रामसभा नहीं हुई वहां अब 31 जनवरी को ग्रामसभा होगी।