बीकानेर. यह प्रकरण जिले के दो अधिकारियों से संबंद्ध है। इनमें से एक अधिकारी बीकानेर उपनिवेशन विभाग में अतिरिक्त आयुक्त हैं तो दूसरे पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक। अतिरिक्त आयुक्त उपनिवेशन गणपतलाल सुथार बीकानेर छोड़ना नहीं चाहते तो पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक यहां आना नहीं चाहते। दरअसल कुछ महीने पूर्व सरकार ने आरएएस अधिकारियों की लंबी स्थानांतरण सूची जारी की थी।
इसमें उपनिवेशन विभाग के अतिरिक्त आयुक्त गणपतलाल सुथार को यहां से स्थानांतरित कर पी.आर.पंडित को विभाग का नया अतिरिक्त आयुक्त लगाया गया। चूंकि सुथार 29 फरवरी को सेवानिवृत्त हो रहे हैं, इसकी दलील देते हुए उन्होंने कार्मिक विभाग से गुहार लगाई कि उन्हें यहां से नहीं हटाया जाए। इसमें पेंशन व अन्य सरकारी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।
कार्मिक विभाग ने सुथार के निवेदन पर संशोधित आदेश तो जारी नहीं किए लेकिन उन्हें पद पर बने रहने के लिए मौखिकतौर पर कह दिया गया। जिन पी.आर.पंडित को यहां ज्वाइन करना था वे पूर्व के पद से रिलीव हो गए और यहां आने का इंतजार कर रहे हैं। सूत्र बताते हैं अब वे यहां एक मार्च को ज्वाइन करेंगे। दूसरी ओर 25 दिन पूर्व सरकार ने बीकानेर पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक के तौर पर डॉ. शैलेष शर्मा को लगाया लेकिन इतने दिन बीत जाने के बाद भी वे यहां कार्यभार ग्रहण नहीं कर सके।
चूंकि सरकारी कार्यप्रणाली में मेडिकल सहित कई ऐसे ऑप्शन हैं और इन्हीं में से किसी एक का सहारा लेकर यहां ज्वाइन नहीं कर रहे हैं। अधिकारियों के आगे सरकार भी बौनी नजर आ रही है। पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ.यू.के.थानवी का कहना है कि अधिकारी ने यहां ज्वाइन किया या नहीं इसके बारे में सोमवार को जानकारी लेंगे।
तो कर्मचारियों से अपेक्षा क्यों
आदेश फरमाने वाले जब अधिकारी ही ऐसा उदाहरण पेश करेंगे तो ये अधिकारी कर्मचारियों से आदेश की पालन की अपेक्षा किस तरह से करेंगे। चार महीने पूर्व उपनिवेशन विभाग में ऐसा ही उदाहरण मिल चुका है। मुख्यालय से एक कर्मचारी को तहसील में स्थानांतरित किया गया लेकिन उसने वहां ज्वाइन नहीं किया। इस मुद्दे पर विभाग ने उस कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई का मन बना लिया। कार्रवाई होने के डर से संबंधित कर्मचारी ने नए स्थान पर कार्यभार ग्रहण कर लिया।