गुना. एक साल की उम्र में पोलियो ने उसके दोनों पैर छीन लिए, लेकिन उसने फिर भी हिम्मत नहीं हारी। उसे एक सही रास्ता दिखाने वाला गुरु भी मिल गया और गुरु के सहार चार साल के प्रयास के बाद अब वह विकलांग मि. इंडिया बाडी बिल्डिंग प्रतियोगिता में भाग लेने जा रहा है। गोपालपुरा के जगवीरसिंह ने अभी तक 8 बार मि. एमपी बाडी बिल्डिंग प्रतियोगिता में भाग लेकर 6 बार गोल्ड पदक प्राप्त कर पहला स्थान प्राप्त किया है।
जगवीरसिंह जाटव एक साल की उम्र में ही पोलियो का शिकार होकर दोनों पैर खो बैठा था। 24 साल तक विकलांगता का दंश झेलने वाले जगवीर को अब विकलांगता बोझ नहीं लगती। गरीबी के बीच पले-बढ़े जगवीर ने सन 2004 में Fातक शिक्षा पूरी की। उसके पिता हरिराम जाटव जिला होमगार्ड में सैनिक के पद पर हैं, जबकि उसकी मां प्रेमबाई जाटव बीड़ी बनाकर परिवार का गुजारा करती है।
जगवीर ने बताया कि उसने भोपाल में मार्शल आर्ट कराते और बूशु भी सीखी, लेकिन सभी दाव-पेंचों को बारीकी से सीखने के बाद भी आज तक वह खेल नहीं पाया। क्योंकि विकलांग होने के कारण वह उन दांवों को नहीं लगा पाता, जो एक स्वस्थ व्यक्ति बड़ी आसानी से लगा सकते हैं।
इसी बीच जगवीर की मुलाकात जिम चलाने वाले अजमत खान से हुई। अजमत ने उसे सहारा दिया और उसे विकलांग मि. एमपी प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया। जगवीर अब पश्चिम बंगाल के दुर्गपुर में 1 से 3 फरवरी तक होने वाली विकलांग मि. इंडिया बाडी बिल्डिंग प्रतियोगिता में नामित किया गया है।