कोटा.
आस्था और विज्ञान के बीच फिर द्वंद्व खड़ा हो गया। भक्तों की मानें तो आरकेपुरम् जैन मंदिर में रविवार रात तिरछी अवस्था में रखी भगवान उदंकनाथ की मूर्ति अचानक सीधी खड़ी हो गई। इसी तरह माला रोड पर शीतला माता के भक्तों ने दावा कर दिया कि माता की मूर्ति गणोश प्रतिमा में बदलने लगी है।
‘भास्कर’ ने जब इन दावों का आधार जानने का प्रयास किया तो वैज्ञानिक ने इसे सिरे से खारिज कर दिया, लेकिन दोनों ही स्थानों पर रात तक भक्तों की भीड़ लगी रही।पंच कल्याणक महोत्सव में सीधी हुई तिरछी मूर्ति, शीतला माता लेने लगी नया रूप। आरकेपुरम स्थित मुनि सुव्रतनाथ जैन मंदिर के त्रिकाल चौबीसी के पंचकल्याणक महोत्सव में रविवार सुबह भक्तों के एक दावे ने चमत्कार की एक नई चर्चा शुरू कर दी।
वहां 125 मूर्तियों में से 70 का मंत्रोच्चर करने के बाद शेष 71 प्रतिमाओं पर 48 मंत्रों से मंत्रोच्चर चल रहा था। मुनिश्री चिन्मय सागर महाराज सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र के मंत्रों का उच्चरण कर रहे थे, तभी 48 वें मंत्र का लोंग से उच्चरण करते समय अचानक भविष्यकाल के 8वें तर्ी्थकर भगवान उदंकनाथ की तिरछी प्रतिमा खड़ी हो गई और करीब 6 इंच आगे खिसक गई।
यह देख वहां मौजूद भक्तों ने जयकारे लगाने शुरू कर दिए। मुनिश्री ने उन्हें शांत किया और मंत्रोच्चर जारी रखा। शेष सभी मूर्तियां वहीं रही। मंगलवार को उन्हें मंदिर में प्रतिष्ठापित किया जाएगा।
गणोशजी के दूध पीने का भी वैज्ञानिक आधार नहीं
कुछ समय पूर्व श्रृद्घालुओं ने पूरे देश में गणोशजी की प्रतिमा के दूध पीने का दावा किया गया था लेकिन बाद में उसका कोई वैधानिक आधार साबित नहीं हो सका था। वैज्ञानिक भी दैवीय चमत्कारों को श्रृद्घा और आस्था से ही जोड़कर देखते हैं।
क्या कहते हैं प्रत्यक्षदर्शी
प्रत्यक्षदर्शी प्रकाश मोदी का कहना है कि इस घटना के समय मुनिश्री के अलावा मूर्तियों के सामने दो प्रतिष्ठाचार्य पंडित सुमित भैया, राकेश भैया, भोपाल के जंबू कुमार जैन व रावतभाटा के विनोद जैन मौजूद थे। चमत्कार के समय मंदिर में सिर्र्फ 4-5 भक्त ही मौजूद थे, उनका कहना है कि मंत्रोच्चर के दौरान शोरगुल ना हो, इसलिए मुनिश्री भीड़ को आने से रोकते हैं।
मुनिश्री का कहना है कि यह अतिशय हुआ है और ऐसा उनके जंगल प्रवास में कई बार होता रहा है। उधर, सकल दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष राजमल पाटोदी और एडवोकेट राजेंद्र जैन का दावा है कि शनिवार मध्यान्ह 3 बजे से रविवार सुबह 4 बजे तक लगातार 13 घंटे तक मुनिश्री मंत्रोच्चर से मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा कर रहे थे, इसी बीच यह शुभ चमत्कार हुआ है।
उनका कहना है कि जहां मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा होती है वहां मंत्रों से शुद्धि की जाती है, जिससे देव वहां निवास करने लगते हैं। राकेश जैन ने बताया कि पूर्व में भी दादाबाड़ी नसियांजी में भी मुनि सुधा सागर महाराज के सानिध्य में हुए पंचकल्याणक के दौरान मूर्तियों से जल-धारा निकली थी।
शीतला माता की प्रतिमा ने धारण किया गणोश का रूप!
आस्थावान लोगों की माने तो रविवार को माला रोड के शीतला माता मंदिर में शीतला माता की प्रतिमा बदल गई। लोगों का कहना है कि रात्रि में प्रतिमा के गणोश जी की भांति एक सूंड और आंखें उभर आई । इसे चमत्कार मानते हुए लोगों की भीड़ लग गई लेकिन, रात्रि 11 बजे वहां सन्नाटा फैल गया।
परिवर्तित प्रतिमा को सबसे पहले माला रोड निवासी हरीश पांडे ने रात्रि 8:15 बजे देखा। उन्होंने तुरंत पुजारी विश्वनाथ भारती को सूचना दी। पुजारी ने मंदिर में आकर देखा तो प्रतिमा में गणोश जी की आकृति उभरी हुई थी। यह बात पूरे क्षेत्र में फैल गई और लोग दर्शन करने पहुंच गए। उन्होंने पूजा अर्चना कर आतिशबाजी की। दर्शन करने के लिए महावीर नगर, विज्ञान नगर से भी श्रद्धालु आए।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि पहले यह प्रतिमा बिल्कुल सपाट थी। शाम 5 बजे इसे सपाट स्वरूप में देखा गया था। यह मंदिर लगभग 30 वर्ष पुराना है। इससे पहले यह प्रतिमा पीपल के पेड़ के नीचे स्थापित थी। 11.30 बजे भास्कर प्रतिनिधि ने जाकर देखा तो वहां मूर्ति के सामने दीपक जल रहा था लेकिन, दरवाजा बंद था। न भजन हो रहे थे न ही कोई जागरण।
मंदिर की बहुत मान्यता है। मंदिर के बनने के बाद यहां एक्सीडेंट भी कम हो गए है। शाम तक यह मूर्ति शीतला माता की थी पर रात्रि में गणोश जी की हो गई।
—आशीष यादव, स्थानीय निवासी
मैं यहां काफी सालों से पूजा करने आता हूं। पहले यह प्रतिमा सपाट थी, अब इसमें गणोश की आकृति उभर गई। अब इसे चमत्कार नहीं मानें तो क्या मानें।
—सोहन शर्मा, स्थानीय निवासी
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह संभव नहीं
आस्था से जुड़ी दोनों घटनाओं के बारे में भास्कर ने जब विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग परियोजना अधिकारी आरके गुजराल से जानना चाहा तो उन्होंने कहा कि जब तक किसी भी वस्तु को एक्सटर्नल सपोर्ट नहीं मिलता है, तब तक कोई चीज हिल भी नहीं सकती। चाहे वह हवा का दबाव हो या कोई उसे हिलाए, तभी कुछ हो सकता है। अपने-आप कोई मूर्ति अपनी पोजिशन नहीं बदल सकती।
फिर भी चमत्कार हो सकता है। यह देश देवी-देवताओं और उनके चमत्कारों की कथाओं से भरपूर है, इसलिए चमत्कार हो भी सकता है, लेकिन वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ऐसा नहीं हो सकता। शीतला माता मंदिर के बारे में गुजराल ने बताया कि विज्ञान के युग में यह असंभव है। पत्थर में परिवर्तन मौसम के अनुसार हो सकता है, पर इसमें कई साल लग सकते हैं।