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डायबिटीज का असर किडनी पर

अमृतसर. मौजूदा समय में डायबिटीज और हाई ब्लड प्रैशर से किडनी पर बुरा असर पड़ने के मामले बढ़ते जा रहे हैं। अगर किडनियों को बचाना है तो उक्त दोनों बीमारियों को कंट्रोल करना बहुत जरूरी है। यह जानकारी एस्कार्ट अस्पताल के डायबिटीज स्पैशलिस्ट डा. गौरव ठकुराल ने रविवार को रिट्ज होटल में चिन्मय मिशन वानप्रस्थ संस्थान की ओर से करवाए गए कार्यक्रम में दी।

इसमें मिशन के सचिव अविनाश महेन्द्रू, संस्थान के इंचार्ज प्रो.एसएन जोशी सहित कई लोगों ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि काम का बोझ, तनाव भरी जिंदगी के कारण लोगों में डायबिटीज और हाई ब्लड प्रैशर की बीमारी बढ़ रही है। यह बीमारी यहीं तक सीमित नहीं रहती।

इसके बढ़ने से मरीजों की किडनियों पर भी बुरा असर पड़ता है। किडनी पर इनका असर कैसे होता है, के बारे में उन्होंने बताया कि हाई ब्लड प्रैशर से खून का दौरा तेज हो जाता है, जिससे किडनी को जाने वाली आरर्टिज ब्रेक हो जाती है और किडनी के फेल होने का खतरा बढ़ जाता है। इसी तरह डायबिटीज में खून थिक्क हो जाता है, जिससे किडनियों पर बुरा असर होता है।

उन्होंने कहा कि खून हमारे शरीर का एक ऐसा तत्व है, जिसे जीवन में सबसे ज्यादा ट्रांसप्लांट किया जाता है। खून का प्रैशर जिस अंग में तेज होगा, उस पर बुरा प्रभाव डालेगा। उन्होंने कहा कि ऐसी हालत में किडनियों को एक ही सूरत में बचाया जा सकता है कि हम डायबिटीज और हाई ब्लड प्रैशर पर कंट्रोल करें। इसके मरीजों को दवाई खानी चाहिए और रेगुलर चैकअप करवाना चाहिए।

डा. ठकुराल ने बताया कि इस समय देश में डायबिटीज और हाई ब्लड प्रैशर के कारण जिन की किडनियों पर बुरा असर पड़ा है उनकी संख्या देश में पांच करोड़ के करीब है। पंजाब की बात करें तो इस बारे में कोई ठोस आंकड़े नहीं मिलते हैं । उन्होंने कहा कि किडनी खराब होने के बाद सबसे बड़ी मुश्किल किडनी डोनर का न मिलना है।

उन्होंने कहा कि अगर पारिवारिक सदस्य की किडनी ही पीड़ित मरीज को लगाई जाए तो वह ट्रांसप्लांट भी काफी सफल रहता है। किसी दूसरे की किडनी लगाने में वह सफलता नहीं मिलती।





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