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पीजीआई में होगा लिवर ट्रांसप्लांट!

चंडीगढ़अब पंजाब, हरियाणा, हिमाचल और चंडीगढ़ के लोगों को लिवर ट्रांसप्लांट के लिए न तो दिल्ली जाना पड़ेगा और न ही बहुत ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ेगा। कारण, पीजीआई का हिपेटोलॉजी डिपार्टमेंट लिवर ट्रांसप्लांट यूनिट शुरू करने जा रहा है।

बहुत जल्द शुरू होने जा रहा ये यूनिट देश के गिने-चुने लिवर ट्रांसप्लांट यूनिट में से एक होगा। लिवर ट्रांसप्लांट के बाद मरीज को 48 घंटे आईसीयू में रखा जाता है। इसके लिए यहां अलग से लिवर आईसीयू बनाने का काम शुरू हो चुका है। इसमें आठ बेड होंगे। लिवर मेटाबॉलिक फंक्शन को कंट्रोल करता है। अगर किसी वजह से लिवर डैमेज हो जाए तो ट्रांसप्लांट के जरिये उसे निकाल कर उसकी जगह नॉर्मल लिवर लगा दिया जाता है।

पीजीआई के हिपेटोलॉजी डिपार्टमेंट के हेड डॉ. वाई. चावला कहते हैं, पीजीआई में हर माह लिवर की समस्या से ग्रस्त जितने मरीज आते हैं, उनमें से 7-8 को ट्रांसप्लांट की जरूरत होती है। एक साल में ऐसे करीब 100 मरीज पहुंचते हैं। हिपेटोलॉजी वार्ड में भर्ती मरीजों में से 75 फीसदी मामलों में लिवर खराब होने का कारण एल्कोहल होता है। ओपीडी में हर हफ्ते जितने मरीज आते हैं, उनमें से 10-15 फीसदी में लिवर डिजीज का कारण भी एल्कोहल होता है।

शराब क्यों करती है लिवर खराब

शराब में इथाइल एल्कोहल होता है जो लिवर में इंफ्लेमेशन कर देता है। लिवर में इंफ्लेमेशन होने से सिरोसिस हो जाता है, जो लिवर को डेमेज करता है।

कहां-कहां होता है लिवर ट्रांसप्लांटगवर्नमेंट सेक्टर: ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस (एम्स) और संजयगांधी पीजीआई लखनऊ

प्राइवेट सेक्टर:

सर गंगाराम हॉस्पिटल, अपोलो हॉस्पिटल नई दिल्ली, ग्लोबल हॉस्पिटल, हैदराबाद

लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत क्यों

लिवर डेमेज होने के बाद मरीज कोमा में चला जाता है। अगर समय पर लिवर को ट्रांसप्लांट न किया जाए तो मरीज की जान भी जा सकती है।

कौन कर सकता है लिवर डोनेट

1. घनिष्ठ रिश्तेदार जिसकी उम्र 50 साल से कम हो।2. कोई भी डेड बॉडी जिसका ब्रेन डेड हो और हार्ट बीटिंग हो।

कितना खर्च आएगालिवर ट्रांसप्लांट के लिए प्राइवेट हॉस्पिटल में 20-25 लाख रुपए खर्च करने पड़ते हैं, वहीं पीजीआई में ये ट्रांसप्लांट 5-6लाख रुपए में हो जाएगा।

ट्रांसप्लांट यूनिट के लिए

लिवर ट्रांसप्लांट यूनिट लगाने के लिए संबंधित विभाग में एक ट्रांसप्लांट हिपेटोलॉजिस्ट, एक ट्रांसप्लांट सर्जन और एक एनैस्थीसियन होना चाहिए। पीजीआई में ये सभी हैं।

किस-किस को मिलेगा फायदा

इस यूनिट के खुलने से चंडीगढ़ के अलावा पंजाब, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और जम्मू कश्मीर के मरीज भी लाभ उठा सकते हैं।





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