जयपुर. नेहरू युवा केंद्रों ने युवा गतिविधियों को प्रोत्साहन देने के लिए केंद्र की ओर से भेजे गए करीब 50 करोड़ रुपए का खेल कर दिया है। इन केंद्रों के पास न तो पिछले तीन साल में मिली इस राशि के खर्च का कोई हिसाब है और न ही किसी गतिविधि का ब्योरा। ऑडिट आपत्ति के बाद केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय ने प्रदेश में स्थित नेहरू युवा केंद्रों को निकट भविष्य में फंड देने पर रोक लगा दी है।
नेहरू युवा केंद्र संगठन के इस फैसले से जोनल डायरेक्टरों के दफ्तरों और जिलों में अफरा-तफरी का माहौल का है। नेहरू युवा केंद्र संगठन के डायरेक्टर फाइनेंस एसके ठाकुर के हस्ताक्षरों से जारी एक पत्र में कहा गया है कि 31 मार्च, 2007 के बाद दो हजार रुपए से ज्यादा किए गए किसी भी अग्रिम भुगतान का समायोजन नहीं किया जाएगा। डायरेक्टर फाइनेंस ठाकुर ने नेहरू युवा केंद्रों को पत्र भेजे जाने की पुष्टि की है।
ठाकुर के अनुसार सभी जोनल डायरेक्टरों से यह भी कहा गया है कि वे मामले की गंभीरता को समझें और खातों को नए सिरे से चेक कर लें। विभागीय गतिविधियों से जुड़े लोगों ने संकेत दिया है कि केंद्र से मिली चेतावनी को आपराधिक प्रकरण माने जाने का संकेत समझा जा रहा है। इसे लेकर केंद्रीय युवा और खेल मंत्री मणिशंकर अय्यर खुद भी खफा हैं।
युवा और खेल मंत्री की लताड़
नेहरू युवा केंद्रों की गतिविधियों के संबंध में 8 जनवरी, 08 को केंद्रीय खेल और युवा मंत्री ने जब बैठक ली तो 50 करोड़ 30 लाख रुपए के घपले का यह मामला खुला। मंत्री ने जब नेहरू युवा केंद्र संगठन के महानिदेशक से खर्च की जानकारी चाही तो उनसे कोई जवाब देते नहीं बना। इसके बाद ही इस प्रकरण में कार्रवाई शुरू हो पाई।
अब क्या हो रहा है?
जोनल दफ्तरों में अब काफी हलचल मची है। वे पिछले तीन साल के दौरान केंद्र से आए धन के खर्च को जायज ठहराने के लिए पुराने बिलों के संग्रह में लगे हैं और हिसाब-किताब टटोल रहे हैं। नेहरू युवा केंद्र संगठन के महानिदेशालय की ओर से भेजा गया वह प्रपत्र गलफांस बन गया है, जिसमें खर्च का ब्यौरा मांगा गया है।