जयपुर/प्रदेश के विभिन्न अंचलों से. राजधानी के जयपुर विरासत फाउंडेशन के साहित्यिक समारोह में रविवार को राजस्थानी लेखकों को मंच से उतारने की घटना को लेकर प्रदेश भर में आक्रोश फूट पड़ा है। सोमवार को विभिन्न जिलों में अंग्रेजी लेखिका नमिता गोखले की पुस्तकें जलाई र्गई। जोधपुर में टॉक शो हुआ। बीकानेर में साहित्यकारों की बैठक में घटना की निंदा की गई।
उदयपुर से गोखले को ई-मेल भेज विरोध दर्ज करवाया गया। अजमेर, कोटा, सीकर, अलवर और नोहर सहित कई जगह घटना के खिलाफ आक्रोश व्यक्त किया। कार्यक्रम आयोजक जयपुर विरासत फाउंडेशन की भी कड़ी निंदा की गई। साहित्यकारों में गुस्से को देखते हुए गोखले ने दोपहर बाद क्षमा मांग ली। जयपुर में अखिल भारतीय राजस्थानी भाषा मान्यता संघर्ष समिति, प्रगतिशील लेखक संघ सहित कई संगठनों ने बैठकें करके घटना की कड़ी निंदा की। संघर्ष समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता इकराम राजस्थानी ने गोखले को देशद्रोही बताया।
अहंकार बोला
वरिष्ठ लेखक व साहित्यकार डॉ. रामप्रसाद दाधीच ने कहा कि जयपुर की घटना के प्रति निंदनीय से भी बढ़कर यदि कोई शब्द शब्दकोष में हो तो उसका प्रयोग करना चाहिए। यह राजस्थानी भाषा की अस्मिता का अपमान है। वहां किसी अंग्रेजी लेखिका नहीं, बल्कि उसका अहंकार्र बोला था। मुझे दुख है कि कार्यक्रम में बैठे लोगों ने इसका प्रतिकार क्यों नहीं किया।
भविष्य में ऐसा न हो
लेखक व जयनारायण व्यास विवि के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर कल्याण सिंह शेखावत ने कहा कि घटना के विरुद्ध निंदा की जानी चाहिए। पहले भी पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ पहाड़िया ने महादेवी वर्मा का अपमान किया था। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो इसकी पुख्ता व्यवस्था करनी चाहिए।
ये भाषा का भी अपमान
साहित्यकार ओंकारनाथ चतुर्वेदी का कहना है कि यह हिन्दी भाषा पर अंग्रेजी भाषा का हावी होना है। यह तो अंग्रेजी साहित्य लिखने वालों का मनभेद है, जिसने इस तरह से एक प्रादेशिक भाषा के साहित्यकार का अपमान किया। इससे तो साहित्यकारों के साथ-साथ हमारी भाषा का भी अपमान हुआ है।
शर्मनाक नजरिया
साहित्यकार शरद तैलंग ने कहा कि अपमान तो किसी का भी हो, सही नहीं है। अंग्रेजी वाले प्रादेशिक भाषा को कम आंकते हैं। जबकि वे भी हिंदी से ही कई बातें सीखते हैं। इस घटना से अंग्रेजी साहित्यकारों का जो नजरिया सामने आया है वह शर्मनाक है। अंग्रेजी भाषा का वर्ग अपने आप को सब पर हावी समझता है, यह बहुत गलत है।
मैं क्षमा चाहती हूं
भास्कर के पाठकों के लिए अंग्रेजी लेखिका नमिता गोखले का माफीनामा हूबहू प्रकाशित किया जा रहा है :
‘‘मुझे यह जानकर बेहद दु:ख हुआ कि मेरे व्यवहार से श्री चंद्रप्रकाश देवल और श्री श्रीलाल मोहता आहत हुए। वस्तुत: कार्यक्रम के बाद मैंने उनसे क्षमा मांगते हुए समयानुसार कार्यक्रम चलाने की अपनी विवशता जाहिर की थी। मेरी एकमात्र चिंता यह थी कि हिंदी की विख्यात लेखिका चित्रा मुदगल, जो राजस्थान में हमारी मेहमान थीं, उनके समय में कटौती न हो।
पिछले हफ्ते के कार्यक्रमों में भी मुझे अनेक अंग्रेजी, फ्रांसीसी, हिंदी तथा राजस्थानी लेखकों को समय सीमा को लेकर टोकना पड़ा था, क्योंकि मैं किसी भी आयोजन में समय की पाबंदी का विशेष ध्यान रखती हूं। अंग्रेजी के एक सत्र में मशहूर प्रकाशक अलेक्सांड्रा प्रिंगल के समय को भी हमें कम करना पड़ा था, हालांकि वे इंग्लैंड से खास इस आयोजन के लिए ही आई थीं।
जयपुर लिटरेरी फेस्टिवल भारतीय व विदेशी साहित्य को समर्पित है, खासकर राजस्थानी साहित्य को, जो कि मुझे अत्यंत सशक्त एवं समृद्ध लगता है। समय की पाबंदी को लेकर अगर मेरा रवैया कहीं कटु हो गया हो, तो उसके लिए मैं हृदय से क्षमा चाहूंगी।
-नमिता गोखले