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पेंटिंग पर पुताई

जयपुर.painting करीब डेढ़ साल पहले शहर के 6 रेलवे ओवरब्रिज व फ्लाइओवरों पर बनवाई गई थीम आधारित पेंटिंग्स अब जल्द ही बीते जमाने की बात बन जाएगी। इन पर यह कार्य जेडीए ने कराया था, लेकिन अब ये नगर निगम के अधीन आ गए हैं। लाखों की लागत से बनी पेंटिंग को निगम ने पुतवाने की तैयारी कर ली है।

वर्तमान में मालवीय नगर व बाईस गोदाम आरओबी पर पेंटिंग्स और कलर को प्राइमर एवं व्हाइट वाश से पोता जा रहा है। बाद में गोपालपुरा बाइपास, टोंक फाटक, सांगानेर तथा अजमेर रोड आरओबी व फ्लाइओवरों से पेंटिंग्स हटाकर इन पर अलग तरह की पेंटिंग्स व डिजाइन्स बनाई जाएंगी। इन पेंटिंग्स को फिर से सही कराने के बजाय पूरी तरह मिटाने पर इन्हें बनाने वाले कलाकारों में भी आक्रोश है। उनका कहना है कि पेंटिंग पुतवाने से पहले उनसे सलाह भी नहीं ली गई।

आठ कलाकारों ने बनाई थी पेटिंग्स

करीब दो साल पहले जेडीए ने इन आरओबी व फ्लाइओवरों पर पेंटिंग्स कराने की कवायद शुरू की थी। इसके लिए जवाहर कला केंद्र से संपर्क किया था तथा एक विशेषज्ञ समिति बनाकर आठ कलाकारों का चयन किया था। 16 मार्च, 2005 को हुए एग्रीमेंट के अनुसार हर कलाकार को एक स्थान पर पेंटिंग्स बनाने, पेंट के खर्चे से लेकर मजदूरी तक का काम सौंपा गया था।

खास बात यह है कि अनुबंध के दौरान कलाकारों का 10 प्रतिशत भुगतान यह कहकर रोक लिया था कि यह राशि उन्हें तब दी जाएगी, जब अगले तीन वर्ष तक इन पेंटिंग्स की गुणवत्ता में फर्क नहीं आएगा। इसके बावजूद बिना कलाकारों से संपर्क किए डेढ़ साल में ही इन पेंटिंग्स को पूरी तरह से मिटाया जा रहा है।

लगाई गई थी सुरक्षा परत

ये पेंटिंग्स विशेष कलर से बनाई थीं। यह कलर केवल पानी घोलकर ही प्रयोग में लिया जाता है। इसमें ऑयल नहीं मिलाया जाता। पेंटिंग्स को मुख्यमंत्री ने काफी सराहा और इनकी सुरक्षा के उपाय करने के निर्देश दिए थे। जेडीए द्वारा पेंटिंग्स पर पॉलीविनाइल एसीटेट की प्रोटेक्शन लेयर लगाई गई थी। महीन पॉलीथिन जैसी इस लेयर के लगाने के बाद पेंटिंग्स को धोने पर भी कोई असर नहीं होने का दावा किया जा रहा था।

सीईओ मनोहरकांत से बातचीत

इन पेंटिग्स को क्यों पोता जा रहा है?

कुछ स्थानों पर पेटिंग्स और डिजाइनिंग का कलर धुंधला गया था। इससे इन्हें फिर से पुतवाया जा रहा है।

पहले बनाई गई डिजाइन्स को ही क्यों नहीं रिनोवेट किया जा रहा?

पहले मरम्मत का ही काम करवाने का विचार था, लेकिन बाद में महापौर, जेडीए आयुक्त आदि से चर्चा कर फिर से बनाने का ही निर्णय लिया गया।

पुरानी पेंटिंग्स बनाने वाले कलाकार इसका विरोध कर रहे हैं?

पहले जेडीए ने इन कलाकारों से बनवाई थीं, अब नगर निगम इनको अपने स्तर पर डिजाइन करा रहा है।

डिजाइनों का निर्धारण हो चुका है?

हां।

इस बार किससे इस संबंध में सलाह-मशविरा कराया जा रहा है?

निगम ने अपने स्तर पर ही निर्धारण किया है।





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