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कर्ज चुकाने के लिए खेत बेचें या मकान

इंदौर. खुड़ैल के सुभाष चौधरी और सेमल्याचाऊ के महेश पटेल तय नहीं कर पा रहे हैं कि बैंक का कर्ज चुकाने के लिए जमीन बेचें या मकान। कर्ज लिया था सोयाबीन की बुआई के लिए और फसल चट कर गई इल्लियां। ऐसा मालवा-निमाड़ के हजारों किसानों के साथ हुआ।

सितंबर में सांवेर में खाती समाज के सम्मेलन के दौरान सोयाबीन की फसल में इल्लियों का मामला उठा तो मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने प्रति हेक्टेयर ७५क्क् रुपए मुआवजे की घोषणा कर दी। प्रभावितों की सूचियां भी बनीं लेकिन मुआवजा मिला इंदौर जिले के टोडी, खाखरोड़ और कटकिया के ३१६ किसानों को। दो सौ गांवों के पांच हजार से ज्यादा किसान आज तक चक्कर ही काट रहे हैं। खुड़ैल के रितेश मुकाती ने बताया बैंक से तकादे आने लगे हैं। अब मकान-जमीन बेचकर ही कर्ज चुकाना होगा। ग्राम सेवक मानसिंह चौधरी ने बताया ११ गांवों के दो सौ से ज्यादा किसानों की ९२४ हेक्टेयर फसलें प्रभावित हुईं थीं।

1.58 लाख हेक्टेयर की फसलें प्रभावित : 2007 में इंदौर जिले में 2.21 लाख हेक्टेयर से ज्यादा में सोयाबीन बोई थी। किसानों ने ग्रीन कार्ड योजना के तहत खेती के लिए लोन लिया जो सितंबर-अक्टूबर में फसल बेचकर चुकाना था। उससे पहले ही 1.58 लाख हेक्टेयर की फसलें इल्लियां चट कर गई। प्रति हेक्टेयर 25-30 हजार रुपए का नुकसान आंका गया। सबसे ज्यादा नुकसान सांवेर क्षेत्र में हुआ।

69.89 हेक्टेयर का ही मुआवजा : सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इल्लियों से खराब 1.58 लाख हेक्टेयर की फसल में से 1.53 लाख हेक्टेयर का उपचार कर लिया गया। फिर भी पांच हजार हेक्टेयर की फसलें पूरी नष्ट हुईं। मुख्यमंत्री द्वारा घोषित दर से भी मुआवजा 3.75 करोड़ होता है लेकिन बंटा 5.24 लाख रुपया, जो महज 69.89 हेक्टेयर का है।





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