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कुर्क होंगे पश्चिमी क्षेत्र के आठ मैरिज गार्डन

इंदौर. एक-एक दिन में लाखों रुपए कमाने वाले मैरिज गार्डन के लखपति संचालक जिला प्रशासन को हजारों रुपए डायवर्शन शुल्क देने के लिए तैयार नहीं हैं। हालात यह है कि सालों से संचालित गार्डनों ने एक भी साल का डायवर्शन शुल्क जमा नहीं किया। नोटिस पर नोटिस देकर शुल्क की मांग करने वाले जिला प्रशासन ने अब सख्ती करते हुए पश्चिमी क्षेत्र के आठ मैरिज गार्डन को कुर्क करने का निर्णय लिया है। कई सालों से शुल्क देने के लिए जिला प्रशासन, गार्डन संचालक और आईडीए के बीच आंख-मिचौनी का खेल चल रहा था।

आईडीए द्वारा स्कीम-71 में आवासीय उपयोग के लिए दिए गए कुछ प्लॉटों पर मैरिज गार्डन बना लिए गए। प्रति गार्डन को कुछ हजार रुपए प्रतिवर्ष डायवर्शन शुल्क के रूप में जिला प्रशासन को देने थे मगर पश्चिमी क्षेत्र के आठ गार्डन के संचालकों ने सालों से एक रुपए भी नहीं दिया। आज हजारों का शुल्क 25 लाख से भी अधिक हो गया, इसे देने के लिए हर साल प्रशासन ने नोटिस भी भेजे मगर अधिकांश गार्डन संचालकों ने यह कहकर शुल्क देने से इंकार दिया कि उक्त प्लॉट आईडीए के थे इसलिए वह ही डायवर्शन शुल्क दे।

इसके बाद यह मामला आईडीए तक पहुंचा तो वहां भी रहवासी जमीन का व्यावसायिक उपयोग करने पर लीज निरस्त करने का तय किया गया, इसके बाद फिर डायवर्शन शुल्क लेने के लिए दबाव बनाया गया। इससे बचने के लिए तो कुछ संचालकों ने गार्डन बंद होना तक बता दिया गया, इसके लिए शपथ पत्र भी दिए गए। नोटिस देकर त्रस्त हो चुके प्रशासन ने अब इन्हें कुर्क करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में एसडीएम चंद्रमौलि शुक्ला ने कुर्की करने की पुष्टि करते हुए बताया इसके लिए प्रक्रि या शुरू कर दी गई है।

गार्डन बंद होने के गलत शपथ पत्र दिए

डायवर्शन अधिकारी अजरुनसिंह चौहान का कहना है कि जिन गार्डनों ने आईडीए की आपत्ति के बाद भी गार्डन बंद कर दिए हैं उन्हें भी बकाया शुल्क को तो देना होगा, इसलिए बंद करने की बात पर कुर्की की कार्रवाई से नहीं बच सकते। कुछ गार्डन संचालकों ने शुल्क से बचने के लिए गार्डन बंद करने के गलत शपथ पत्र तक दे दिए, इनमें उन्होंने लिखा है कि वे प्लॉट का कोई व्यावसायिक उपयोग नहीं कर रहे हैं।

नोटिस के लिए भी चक्कर पे चक्कर

रेवेन्यू इंस्पेक्टर मदनचंद यादव ने बताया गार्डन संचालक नोटिस लेने से मना कर देते हैं। उन्हें नोटिस की तामील करवाने के लिए भी उनके घर और गार्डन के बीच कई चक्कर लगाना पड़ते हैं।

नहीं देंगे डायवर्शन शुल्क

कुर्की के निर्णय के बाद भी प. क्षेत्र के मैरिज गार्डन संचालक अभी भी डायवर्शन शुल्क देने को तैयार नहीं हैं। वे इससे बचने के लिए अलग-अलग तर्क दे रहे हैं। परस्पर मैरिज गार्डन के संचालक मनीष बजाज का कहना है कि मैंने आईडीए का उक्त प्लॉट कम्युनिटी हॉल के लिए लिया था, इसमें जो काम हम कर रहे हैं वही किया जाना है।

जिला प्रशासन हमें सालों से नोटिस देकर परेशान कर रहा है, यदि उसे डायवर्शन शुल्क चाहिए तो आईडीए से वसूल करे। श्रीनाथ गार्डन के संचालक सोहन सोढ़ानी का कहना है कि आईडीए की आपत्ति के बाद से ही हमने गार्डन बंद कर दिया, इसलिए डायवर्शन शुल्क किस बात का। ताराकुंज गार्डन के संचालक आनंद सोमानी का कहना है कि हम आईडीए को लीज रेंट देते हैं, इसमें ही डायवर्शन शुल्क शामिल है।





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