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नाराज संतों ने किया विहार

बावनगजा (बड़वानी). i दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र बावनगजा में महामस्तकाभिषेक के दूसरे अभिषेक के एक दिन पहले सोमवार को एक और पंचामृत अभिषेक हो गया। सुबह 9 बजे हुए महामस्तकाभिषेक के दौरान ब्रrाचारिणी से अभिषेक जल छीनने व स्वयं के साथ हुए र्दुव्‍यवहार से खफा आचार्य सिद्धांत सागरजी ने 28 संतों के साथ शाम पौने चार बजे बावनगजा स्थित संत निवास से विहार (छोड़) कर दिया।

आचार्य सिद्धांत सागरजी ने बताया कमेटी के कार्यवाहक अध्यक्ष शेखर पाटनी व कोषाध्यक्ष राजप्रकाश पहाड़िया से हमने रविवार शाम भगवान आदिनाथ का अभिषेक सोमवार सुबह करने के लिए कहा था। सोमवार सुबह करीब नौ बजे जब हम, उपाध्याय सौभाग्य सागरजी व अन्य संतों के साथ भगवान आदिनाथजी की मूर्ति के शीर्ष तक पहुंचे तो ब्रrाचारिणी सुमन दीदी ने आर्यिका गणनी (सौभाग्यवतीजी) से झूमाझटकी कर अभिषेक जल पात्र छीन लिया।

इससे हमने भी ठान लिया अब तो अभिषेक होकर रहेगा। छत्र के पास के दरवाजे का ताला खुलवाकर एक महिला से पंचामृत अभिषेक करा दिया। इस दौरान करीब तीन सौ भक्त उपस्थित थे। आचार्यजी, उपाध्याय सौभाग्य सागरजी, आर्यिका गणिनी सौभाग्यवतीजी ने कहा मनावर निवासी एक व्यक्ति ने आचार्यजी के साथ र्दुव्‍यवहार किया।

मनाने पहुंचे लेकिन नहीं बनी बात

जब कमेटी के लोगों को पता चला कि आचार्य सिद्धांत सागरजी ससंघ विहार कर रहे हैं तो मुनि सेवा समिति के संयोजक मुन्नालाल जैन महाराजजी से मिलने दोपहर करीब 1.40 बजे संत निवास पहुंचे व एक घंटे की मोहलत मांगी। जब एक घंटे तक कोई नहीं आया तो सिद्धांत सागरजी ससंघ विहार कर गए। वे दर्शन करने सीधे 12 मंदिर पहुंचे।

यहां ट्रस्ट के कार्यवाहक अध्यक्ष शेखर पाटनी, महामंत्री रमेशचंद गोधा, मीडिया प्रभारी हेंसल पहाड़िया आचार्यश्री को मनाने पहुंच गए। बंद मंदिर में करीब एक घंटा लगातार चर्चा के बाद भी कोई हल नहीं निकला। इसका मुख्य कारण समस्त आचार्यो की उपेक्षा रहा। खफा सभी संत बावनगजा परिसर छोड़ बड़वानी के पास स्थित पाश्र्वगिरी चले गए।

गुप्ति सागरजी ने कहा- सोमवार को कोई अभिषेक नहीं हुआ

उधर राष्ट्र संत उपाध्यायश्री गुप्ति सागरजी ने कहा आज (सोमवार को) कोई अभिषेक नहीं हुआ है। आचार्यो से सूरी मंत्रोच्चर न कराने के मामले में उन्होंने कहा मूर्ति पवित्र हुई है, इसका तेज सभी को दिख रहा है। आचार्य सिद्धांत सागरजी ने कुछ किया है तो उन्हीं से जाकर पूछें।

प्रथम महामस्तकाभिषेक के दौरान संतों के नाराज होने की बात पर उन्होंने कहा- इतने बड़े आयोजन में मेरा ऊपर व आचार्यो का नीचे बैठना कोई मायने नहीं रखता। इसे इश्यू नहीं बनाना चाहिए। अब तक जिस तरह महामस्तकाभिषेक हुआ है, वैसा ही होगा।

संतों ने कहा- अपमान हुआ

‘‘हजारों किमी चलकर संत महामस्तकाभिषेक के लिए आए लेकिन यहां सम्मान नहीं मिला। आचार्यो का अविनय हुआ है। हम तो यहां सप्तरंगी अभिषेक के लिए आए थे लेकिन वह भी नहीं हुआ। जिंदगी में पहली बार इस तरह का अपमान सहना पड़ा। सूरी मंत्र आचार्य द्वारा दिया जाता है, क्योंकि सूरी का अर्थ ही आचार्य होता है। सूरी मंत्र आचार्य के न करने से आदिनाथजी की मूर्ति पूजनीय नहीं हुई है।

-सिद्धांत सागरजी, आचार्य

‘‘महाराजजी का अपमान शर्मनाक है। दीदी ने कंमडल छीनकर अच्छा नहीं किया। एक व्यक्ति ने तो महाराजजी के साधु होने पर ही सवाल कर दिया। इस तरह का अपमान सहन कैसे करते, इसलिए यहां से जा रहे हैं।

-सौभाग्यवती, आर्यिका गणिनी

पदाधिकारियों की लीपापोती

‘‘ऐसा कोई मामला नहीं हैं। महाराजश्री तो स्वेच्छा पाश्र्वगिरी दर्शन करने जा रहे हैं, वहां से वापस आ जाएंगे। नाराजगी वाली बात गलत है।

-शेखर पाटनी, कार्यवाहक अध्यक्ष, महोत्सव समिति

‘‘महाराजजी कोई नाराजजी के कारण नहीं जा रहे हैं। संतों के अपमान का मामला भी नहीं है। हमने तो महाराजजी से बात की है। वे खुशी से यहां से जा रहे हैं।

-हेंसल पहाड़िया, मीडिया प्रभारी





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