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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur जांजगीर.
देश का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा कोई भी फहरा सकता है, पर सूरज ढलते ही उसे उतारना भी पड़ता है। नहीं उतारने पर वह दंड का भागीदार बनता है। ऐसी ही चूक ब्लाक डभरा के गांव पतेरापाली नवीन प्राथमिक शाला में हुई। शाला में २६ जनवरी को ध्वजारोहण किया गया। राष्ट्र गान के साथ ध्वज का सम्मान किया गया। पर शाम को सूरज ढलने से पहले यहां के कर्मी झंडा उतारना भूल गए।
शाला में दो शिक्षाकर्मी कार्यरत हैं। ध्वज २६ जनवरी की पूरी रात टंगा रहा। दूसरे दिन लोगों की जानकारी के बाद रविवार की दोपहर लगभग डेढ़ बजे शिक्षाकर्मी सुभाष साहू ने झंडे को उतारा। सुभाष के भाई गोविंद साहू ने बताया कि राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान व नियम ग्रामीण नहीं समझते, इसलिए झंडा टंगा रह गया। वे जशपुर गए थे, दूसरे दिन वापस आए, इसलिए यह चूक हो गई। ऐसी गलती पहले कभी नहीं हुई।
क्या हैं निर्देश
राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान को देखते हुए कुछ वर्षो पूर्व सिर्फ शासकीय कार्यालयों में ही झंडा फहराने की अनुमति थी। एक याचिका के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सभी लोगों को झंडा फहराने की अनुमति दे दी, पर कुछ निर्देश भी दिए। जिसमें झंडे को सूरज ढलने से पहले उतारना व फोल्ड करते समय चक्र को ऊपर रखने के निर्देश थे। ऐसा नहीं करने पर राष्ट्रीय ध्वज अधिनियम के तहत दंड का प्रावधान है।
ऐसी जानकारी मिली है। शिक्षाकर्मी-३ सुभाष साहू से स्पष्टीकरण मांगा गया है। कार्रवाई की जाएगी।
-आनंद दास गुप्ता, डीईओ-जांजगीर