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परिंदों के जीवन में अंधेरा

कोटा. tree नगर विकास न्यास ने शहर में करीब एक सौ पेड़ों के नीचे ढाई सौ वाट की लाइटें लगा दी हैं। रात को जब ये लाइटें जलती हैं तो पेड़ों का सौंदर्य निखर उठता है, लेकिन यह लाइटें पर्यावरणवादियों को कतई नहीं भा रही हैं। उनका कहना है कि इससे पेड़ों पर रहने वाले पक्षियों के जीवन में अंधेरा छा रहा है। न्यास ने शहर के सौंदर्यीकरण की योजना के तहत सिविल लाइंस, सीबी गार्डन और स्टेशन रोड पर घने वृक्षों के नीचे लाइटें लगाई हैं।

रात होते ही पेड़ रोशनी में नहा उठते हैं। देखने में यह दृश्य बहुत ही सुंदर प्रतीत होता है, लेकिन इसके दूरगामी परिणामों को लेकर ंिचंता जताई जा रही है। न्यास ने इन लाइटों को स्ट्रीट लाइट से जोड़ा है। लाइटों की स्थापना एक वर्गाकार बाक्स में की गई है। अंडरग्राउंड केबल से एक को दूसरे से जोड़ा गया है। इस कार्य पर करीब 15 लाख रुपए की लागत आएगी। 130 लाइट लगेंगी : शहर में करीब 130 पेड़ों पर लाइटें लगाई जाएंगी। अभी तक एक सौ पेड़ों पर लाइटें लगाई जा चुकी हैं।

बिजली का कितना खर्च : ढाई सौ वाट की एक सौ लाइटों के एक घंटा लगातार जलने पर 25 यूनिट बिजली खर्च होगी। यदि ये लाइटें चार घंटा जलती हैं तो सौ यूनिट बिजली खर्च होगी, जिसका करीब चार सौ रुपए प्रतिदिन विद्युत निगम को भुगतान करना पड़ेगा। पक्षियों का बसेरा छूटेगा, पेड़ मर जाएंगे : पर्यावरणविदों की राय में पेड़ों पर रोशनी करना न केवल पक्षियों के लिए वरन् पेड़ों के लिए भी अत्यंत घातक है।

इस बारे में विशेषज्ञों की राय है कि असमय रोशनी से पक्षियों की जैविक घड़ी प्रभावित होगी। साथ ही पेड़ों को जबरन संशलेषण की क्रिया करनी पड़ेगी, जिससे पेड़ मर जाएंगे।

टाइमर लगाए जाएंगे

लाइटों को जलाने व बंद करने के लिए टाइमर लगाए जाएंगे। एक बल्ब पर करीब दो रुपए प्रतिदिन बिजली खर्च आएगा। बाद में इसे दो घंटे ही जलाने की योजना है।
—महावीर टाक, विद्युत अभियंता, न्यास

पेड़ों के नीचे लाइट और जू के आसपास शोर के संबंध में जिला कलेक्टर अभय कुमार से की गई बातचीत

जू के आसपास शादियों के सीजन में बहुत शोर होता है?
जवाब -जू अथॉरिटी इसे देखती है, वहां से कभी कोई इस संबंध में कुछ नहीं कहा गया। यदि जू अथॉरिटी कहेगी तो इसे देखेंगे।

पेड़ों के नीचे लाइट लगाना उचित है? पर्यावरणविद् चिंता जता रहे हैं।
जवाब -इस संबंध में मेरे सामने तो कोई मामला आया नहीं। यदि कोई आएगा तो उस पर विचार करेंगे।

जबरन प्रकाश संशलेषण

तेज रोशनी के प्रभाव से पक्षी पेड़ों को छोड़ देंगे, लेकिन पेड़ कहां जाएंगे। पेड़ सूर्य की रोशनी में प्राकृतिक रूप से प्रकाश संशलेषण की क्रिया करते हैं। जब उन्हें अतिरिक्त रोशनी मिलेगी तो यही क्रिया उन्हें फिर से करनी पड़ेगी। यह पेड़ों के लिए घातक होगा।
—डा. एल. के. दाधीच, पर्यावरणविद्

जैविक घड़ी प्रभावित होगी

हर जीव के लिए प्रकाश या अंधेरे की अवधि जैविक क्रिया को प्रभावित करती है। पक्षियों में इसका खास असर होता है। प्रकाश के प्रभाव से शरीर में हारमोन स्त्रावित होता है, जिसका असर अन्य हारमोन स्त्राव पर पड़ता है। इससे पक्षी बीमार होंगे अथवा उनकी मौत तक संभव है।
—डा. प्रहलाद दुबे, व्याख्याता, राजकीय कॉलेज

वन्यजीव भी पीड़ित

नयापुरा में स्थित जू के वन्यजीव भी इन दिनों शादियों की धूमधाम से काफी पीड़ित हैं। इनकी दिनचर्या भी प्रभावित हो रही है। नयापुरा में जेके पेवेलियन में हर रोज होने वाली शादियों में तेज आवाज में बजने वाले डीजे, जनरेटर और आतिशी धमाकों की वजह से वन्यजीव प्रभावित हो रहे हैं। इस संबंध में चिड़ियाघर के अधिकारियों का कहना है कि निश्चित रूप से वन्यजीवों पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है।

जब भी कोई बारात या पटाखों के धमाके सुनाई पड़ते हैं तो वन्यजीवों के हाव-भाव परिवर्तित हो जाते हैं। उनके चेहरे पर बदहवास साफ झलकता है। इसके बावजूद वे जू के निकट किसी भी ऐसे आयोजन को नहीं रुकवा सकते जो वन्यजीवों के जीवन पर प्रभाव डाल रहा है। नियमों में यह प्रावधान नहीं है कि जू से कितनी दूरी पर डीजे या पटाखे चलाए जा सकते हैं।

जू अथॉरिटी से मान्यता नहीं

इसका एक कारण यह भी है कि वर्तमान जू को सेंट्रल जू अथॉरिटी (सीजेडए) से मान्यता नहीं है। सीजेडए ने वर्तमान जू को अन्यत्र स्थानान्तरित करने के निर्देश दे रखे हैं। इसकी पालना में अभेड़ा के निकट नया जू बनाया जाना प्रस्तावित है।

हैदराबाद की तर्ज पर होगा जू

नए जू को बीओटी आधार पर बनाने के प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं। वन अधिकारियों के अनुसार नोएडा और हैदराबाद में बीओटी आधार पर जू का संचालन किया जा रहा है। नोएडा में जू निजी भूमि पर बना है, जबकि हैदराबाद का जू वन भूमि पर है। ऐसे में स्थानीय वन अधिकारी हैदराबाद के जू के मॉडल को उपयुक्त मानकर विचार कर रहे हैं।





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