गुड़गांव. किडनी कांड में पुलिस की छापामारी के दौरान अस्पताल, लेबोरेटरी और कई संस्थानों की मिलीभगत सामने आई है। हालांकि कथित सरगना डॉ. अमित और उनके खास सहयोगियों को दबोचने में कामयाबी नहीं मिली है। दिल्ली में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के अध्यक्ष डॉ. एम अब्बास ने इस मामले के पीछे सरकार के अंग प्रत्यारोपण के सख्त नियम को जिम्मेदार बताया है।
पुलिस आयुक्त मोहिन्दर लाल ने बताया कि गुड़गांव व दिल्ली की 10 लेबोरेटरी, पांच डायग्नोस्टिक सेंटर व तीन अस्पताल के इस रैकेट में शामिल होने के बारे में जांच की जा रही है। होटलों पर भी संदेह: अनेक होटलों के भी किडनी कारोबार में शामिल होने की आशंका है।
डॉ. अमित और उसके सहयोगी डॉ. जीवन राम की आठ लग्जरी गाड़ियां जब्त कर ली गई हैं, साथ ही इन दोनों के आठ बैंक अकाउंट को भी सीज कर दिया गया है। लाल ने बताया कि किडनी रैकेट से जुड़े नौ अन्य डॉक्टरों का अभी तक पता नहीं चल सका है। एक अन्य आरोपी डॉ. उपेंद्र के ड्राइवर हरपाल ने पुलिस की पूछताछ में कई राज उगले हैं।
कई नाम हैं डॉ. अमित के: डॉ. अमित दिल्ली में अमित चौधरी तो मुंबई व नागपुर में संतोष राउत, पुरुषोत्तम, सुरेश, राजेश व आरके जैसे कई नामों से रहता था। संभव है कि अमित दूसरी पत्नी पूनम के पास कनाडा भाग गया है।
प्रतीक्षा में थे 48 विदेशी :
पुलिस को डॉ. अमित व डॉ. उपेन्द्र के कंप्यूटर से 48 ऐसे विदेशी लोगों के नाम मिले हैं, जिन्होंने अपनी किडनी बदलवाने के लिए संपर्क किया था।
आगे भी होती रहेगी ऐसी घटनाएं :
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के अध्यक्ष डॉ.एम अब्बास ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि ‘ऑर्गन डोनेशन नियम १९९४’ में अगर बदलाव नहीं किया गया तो ऐसी घटनाएं आगे भी जारी रहेंगी। नियमानुसार किडनी या अन्य अंगों का दान केवल माता-पिता, पति-पत्नी, या बेटा-बेटी ही कर सकते हैं।
आईएमए के सचिव डॉ. एसएन मिश्रा ने बताया कि भारत में प्रति वर्ष लगभग दो लाख लोगों को विभिन्न तरह के अंगों की जरूरत होती है, लेकिन चार हजार लोगों को ही ये अंग मिल पाते हैं।