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हे राम नहीं थे अंतिम शब्द

लखनऊ. क्या वाकई में 60 वर्षो पूर्व नाथुराम गोडसे द्वारा गोलियों से हत्या किए जाने के बाद महात्मा गांधी ने अपने मुख से हे राम कहा था? ये हम आपसे सवाल नहीं कर रहे हैं बल्कि महात्मा गांधी हत्या मामले में एक नया पेंच सामने आया है।

महात्मा गांधी - ब्रह्मचर्य के प्रयोग नामक किताब के लेखक पत्रकार दयाशंकर शुक्ल सागर ने अपनी किताब में लिखा है कि 30 जनवरी 1948 को गोली लगने के बाद महात्मा के मुंह से निकलने वाले अंतिम शब्द हे राम नहीं थे। सागर का दावा है कि बापू के करीब से चल रही उनकी पोती आभा ने केवल ये शब्द सुने थे। सागर ने दावा किया है कि गोडसे ने बापू के मुंह से हे राम की बजाय आह की चीख सुनी थी।

पुस्तक में महात्मा गांधी के जीवन में आने वाली तमाम विदेशी और स्वदेशी महिलाओं से उनके अंतरंग संबंधों और उनके साथ किए ब्रहाचर्य प्रयोग के अनुभवों का विस्तृत ब्यौरा दिया गया है। लेखक का मानना है कि महात्मा के ब्रहमचर्य की अनोखी व्याख्या प्रचलित परिभाषाओं से एकदम अलग थीं। पुस्तक के अनुसार आश्रम में महात्मा गांधी के ब्रहमचर्य के प्रयोगों को लेकर हुई कानाफूसियों और आलोचनाओं ने स्वतंत्रता आंदोलन के उनके चिंतन को प्रभावित किया।

साथ ही अपने सिद्धान्तों और नैतिक मूल्यों तले दबे महात्मा गांधी नेताजी सुभाषचन्द बोस भगत सिंह और दूसरे क्रान्तिकारियों के साथ न्याय नहीं कर पाये। पत्रकार दयाशंकर शुक्ल सागर की पुस्तक 'महात्मा गांधी: ब्रहाचर्य के प्रयोग' का विमोचन नयी दिल्ली में सात फरवरी को शुरू हो रहे अन्तर्रराष्ट्रीय पुस्तक मेले में किया जाएगा।





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