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यहां फल-सब्जी नहीं, मिलती हैं परेशानियां

इंदौर. प्रदेश की ‘ए’ क्लास मंडियों में शुमार देवी अहिल्या बाई होलकर फल-सब्जी मंडी इन दिनों परेशानियों की मंडी बनकर रह गई है। प्रतिदिन हजारों क्विंटल लहसुन, प्याज, आलू, हरी सब्जियां और फल की आवक वाली इस मंडी में आए दिन व्यापारियों व किसानों के बीच विवाद और स्टाफ की कमी स्थायी समस्याएं बन गई हैं। पूरे परिसर में गंदगी और पीने के पानी की समस्या भी है।

स्टाफ की कमी

विभागीय आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में मंडी में कुल 56 अधिकारी कर्मचारी कार्यरत है। इसमें 1 मंडी प्रभारी, 30 सहायक निरीक्षक, 32 चौकीदार, 1 इलेक्ट्रीशियन व 2 सफाई कर्मचारी शामिल हैं। इसी स्टाफ को लहसुन-प्याज नीलामी, प्रांगण में लगे तीन नाकों पर प्रवेश शुल्क लेना, आवक-जावक, केस, बुक इश्यु सहित निरीक्षण व नियंत्रण का काम भी करना होता है।

वर्तमान में लहसुन की अच्छी आवक और आए दिन विवादों के कारण 25 से अधिक कर्मचारी इसी में लग जाते हैं। अधिकारियों के अनुसार यहां करीब 100 कर्मचारी आवश्यक हैं।

नहीं मिलता पीने को पानी

मंडी में पीने के पानी की बड़ी समस्या है। आसपास के करीब 10 जिलों से आने वाले किसानों व व्यापारियों को यहां प्रतिदिन घंटों गुजारना पड़ते हैं। ऐसे में यहां 1 टंकी व तीन ट्यूबवेल हैं, जिनसे व्यापारियों को कनेक्शन दिया गया है। सार्वजनिक प्याऊ न होने से किसानों को होटलों में पानी पीना पड़ता है। मंडी सचिव उमाशंकर भार्गव कहते हैं समस्या तो है इसके लिए जल्द ही प्याऊ या दो अस्थायी टंकिया रखवाई जा रही हैं।

सफाई व्यवस्था का नहीं है ठौर

मंडी में सफाई ठेका कामथेन सिक्यूरिटीज के पास है। उचित राशि न मिलने से वह भी इस काम को करने में असमर्थ है। व्यापारियों का कहना है थोक सब्जियां लाने वाले किसान सब्जी नहीं बिकने और खराब होने की स्थिति में छोड़कर चले जाते है। मंडी समिति की बैठक में कांक्रीट का कचराघर बनाने का निर्णय हुआ था पर वह भी प्रक्रिया में उलझ गया। खेरची व्यापारियों के लिए जो स्थान तय किया गया है वे वहां के बजाय बीच मार्केट में बैठते हैं। इससे आवाजाही में परेशानी आती है।

आए दिन होते हैंै विवाद

मंडी में लहसुन नीलामी को लेकर आए दिन हंगामे होते हैं। एक सप्ताह में ही दो बार विवाद हो चुके हैं। हालांकि इससे किसानों और व्यापारियों का कोई लेना-देना नहीं है। बताया जाता है कुछ लोग किसान बनकर हंगामा करते हैं और आढ़त शुरू करने की मांग करते हैं। पर्याप्त स्टाफ न होने से मंडी प्रशासन भी पूरी तरह नियंत्रण नहीं कर पाता और विवाद पैदा होता है।





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