भोपाल. मुंबई हादसे के बाद मंगलवार को सक्रिय हुए जिला प्रशासन, आरटीओ और पुलिस के अमले ने बुधवार को स्कूली वैन की जांच के काम से पल्ला झाड़ लिया। बुधवार को पुन: शहर में स्कूली बच्चे एलपीजी गैस सिलेंडर से चलने वाली वैन के सहारे स्कूल पहुंचे। अब जिला प्रशासन ने ऐसी गाड़ियों के चालकों को कागजी चेतावनी दी है कि उन्हें एलपीजी का बिल साथ रखना होगा।
मंगलवार को तीन विभागों की कार्रवाई से शहर के लोगों की उम्मीद जागी थी कि अब स्कूली वैन में खतरनाक ढंग से गैस किट और अवैध रूप से व्यावसायिक इस्तेमाल पर रोक लगेगी। लेकिन बुधवार को तीनों विभागों के अमले ने स्कूली वैनों की जांच नहीं की। बच्चों को मजबूरन खतरे की सवारी में बैठकर स्कूल जाना पड़ा।
उधर कलेक्टर आरके माथुर ने गैस किट लगी वाहनों के ड्राइवरों के लिए आटो एलपीजी का बिल साथ रखने का फरमान जारी किया है। उन्होंने गैस एजेंसियों से उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए अनिवार्य रूप से स्टाक व बेकलाग सूची चस्पा करने को भी कहा है। श्री माथुर ने रसोई गैस के वाहनों में किए जा रहे दुरूपयोग को रोकने के लिए खाद्य शाखा से चेंकिंग मुहिम जारी रखने को कहा है।
होटलों पर छापे: बुधवार को जिला खाद्य साखा के अमले ने बारह नंबर स्टाप के पास स्थित होटल पायल और सईद नगर की होटल शिवानी पर छापा मारा। दोनों होटलों पर रसोई गैस का उपयोग होते पाए जाने पर क्रमश: दो और तीन सिलेंडर जब्त कर कार्रवाई की गई।
व्यावसायिक इस्तेमाल
प्रशासन के तमाम प्रयासों के बावजूद राजधानी में सैकड़ों निजी वैन व्यवसायिक रूप से शैक्षणिक संस्थानों में इस्तेमाल हो रही हैं। क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) स्कूलों में संचालित निजी वैनों के खिलाफ दर्जनभर कार्रवाई कर चुका है, इसके बावजूद अब भी कई निजी वैन धड़ल्ले से व्यवसायिक रूप से चल रही हैं।
मालूम हो कि निजी वाहनों का स्कूलों में व्यवसायिक इस्तेमाल करने वालों को ‘स्कूल वाहन’ या ‘टैक्सी’दर्जे का परमिट लेने के लिए दिसंबर तक की मोहलत दी गई थी। मियाद पूरी होने तक तक करीब डेढ़ सौ स्कूली वैन इन दर्जे में परिवर्तित हो चुकी थी। लेकिन अब भी ढेरों ऐसी निजी वैन हैं, जो स्कूली बच्चों को लाने-लेजाने का काम कर रही हैं।