भोपाल. हमीदिया अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के चलते शव गृह में मंगलवार रात चूहों ने दो लाशों के आंख और कान कुतर डाले। इस घटना से दुखी मृतकों के परिजनों ने बुधवार सुबह शव गृह के बाहर हंगामा कर रोष व्यक्त किया।
अस्पताल के शव गृह में मंगलवार रात गंगाबाई (16) और मोहम्मद इकबाल (50) की लाशें रखी गई थी। शाहपुरा क्षेत्र की निवासी गंगाबाई ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी। वहीं मोहम्मद इकबाल की लटेरी के पास एक सड़क दुर्घटना में घायल होने के बाद मौत हो गई थी।
बुधवार सुबह जब परिजन मृतकों का पोस्टमार्टम कराने पहुंचे तो लाश के चेहरे की क्षत विक्षत स्थिति देखकर चौंक गए। मोहम्मद इकबाल के मित्र एसके पांडे ने बताया कि मो. इकबाल के दोनों कान के निचले हिस्से और बाई आंख की पलक चूहों ने कुतरी हुई थी। वहीं गंगाबाई की बाई आंख और दोनों कान चूहों ने कुतर डाले थे।
इस घटना के सामने आने से हमीदिया अस्पताल के शव गृह की जर्जर स्थिति और यहां बरती जा रही लापरवाही उजागर हो गई है। गांधी मेडिकल कालेज के भवन में स्थित मेडिकोलीगल इंस्टीट्यूट के संचालक डा. डीके सत्पथी ने बताया कि दोनों शव मंगलवार शाम साढ़े पांच बजे के बाद शव गृह के एक कमरे में रखे गए थे।
स्टाफ कम होने के कारण कार्यालयीन समय समाप्त होने के बाद रात को फ्रीजर में शव को रखे जाने की व्यवस्था नहीं है। शवों के कान-आंख कुतरे जाने की घटना पर दुख व्यक्त करते हुए डा. सत्पथी का कहना था कि पिछले चार वर्ष से ऐसी कोई घटना नहीं हुई है। शव गृह में चूहों की रोकथाम करने के लिए उन्होंने बुधवार को वहां दवाएं डालने के निर्देश दिए है।
सिर्फ छह शव रखने की है व्यवस्था
हमीदिया अस्पताल के शव गृह में सिर्फ एक फ्रीजर चालू है, जिसमें मात्र छह शव रखे जाने की व्यवस्था है। यह फ्रीजर भी मेडिकोलीगल इंस्टीट्यूट द्वारा तीन वर्ष पहले खरीदा गया था। सूत्रों के अनुसार गांधी मेडिकल कालेज के फोरेंसिक साइंस विभाग द्वारा करीब पांच वर्ष से फ्रीजर की मांग की जा रही है, परंतु कालेज प्रबंधन द्वारा फ्रीजर खरीदे जाने की कार्रवाई पूरी नहीं की गई है। इसी तरह मेडिकोलीगल इंस्टीट्यूट में वर्ष 1978 में स्वीकृत छह सफाई कर्मियों के स्टाफ से ही शव गृह में काम चलाया जा रहा है। फोरेंसिक साइंस विभाग में मात्र एक सफाई कर्मी पदस्थ है।