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नवजात बेटी को ठंड में मरने छोड़ आया पिता

अमृतसर अपनी नवजात बेटी से छुटकारा पाने के लिए बेरहम बाप ने उसे कड़ाके सर्दी में सड़क के किनारे फेंक दिया। ठंड में ठिठुर कर बेटी की मौत हो गई और बाप अब पुलिस की गिरफ्त में है। इससे भी दर्दनाक यह है कि पीछे रह गई मां और अबोध बेटे की जिंदगी अब कैसे गुजरेगी जब परिवार का एकमात्र कमाऊ सदस्य जेल में होगा। यहां के दुग्र्याणा मंदिर के पास प्यारी बस्ती के पवन कुमार के घर में सोमवार को बेटी पैदा हुई थी।

इंजैक्शन लगवाने निकला था पिता

मंगलवार शाम पवन अपनी पत्नी मंजू के कहने पर बच्ची को इंजैक्शन लगवाने के लिए घर से निकला। डाक्टर के पास जाने की बजाय पवन ने बच्ची को मालमंडी में इप्रूवमैंट ट्रस्ट के फ्लैटों के पास सड़क के किनारे फेंक दिया। उसे उम्मीद थी कि बच्ची को कोई उठा लेगा। इसके बाद पवन कोतवाली पहुंचा और झूठी रिपोर्ट दर्ज कराई कि कुछ अज्ञात लोग उससे बच्ची छीन कर भाग गए। बुधवार की सुबह आठ बजे आल इंडिया ह्यूमन राइट् एसो. (एहरा) के जिला प्रधान डॉ. विनीत सरीन को एक बच्ची के सड़क के किनारे होने की सूचना मिली। उन्होंने इसकी सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने शक के आधार पर पवन से पूछताछ की तो उसने अपना गुनाह कबूल लिया।

पत्नी की बाकी बची जिंदगी संकट में

पवन एक मोमबत्ती बनाने की फैक्टरी में मुलाजिम है। उसके माता-पिता नहीं हैं और बहनें भी अपने घर बसती हैं। उसकी पत्नी मंजू के मायके की हालत भी इतनी अच्छी नहीं कि उसकी देखभाल हो सके। मंजू का कहना है कि उसके पति ने बेटी को मार दिया और अब जेल चला जाएगा। उसके सामने तीन साल के बेटे और खुद का पेट भरने का सवाल खड़ा है।

पंगूड़े तक क्यों नहीं पहुंची

मां-बाप और समाज के ठुकराए नन्हे बच्चों के लिए डीसी केएस पन्नू ने एक पालना घर खोला है। पवन ने अगर बच्ची को फेंकने की बजाय वहां छोड़ दिया होता तो बच्ची जिंदा होती। आल इंडिया भगत पूर्ण सिंह पिंगलवाड़ा में भी नवजात बच्चों को शरण देने की व्यवस्था है। जिला प्रशासन की ओर से रैडक्रास में भी पालना घर बनाया गया है।

क्या कहते है कानून के माहिर

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में क्रिमिनल एडवोकेट संदीप गोरसी के मुताबिक नवजात बच्चे को मारने का मामला जघन्य अपराध है। इस तरह के केसों में बहुत कम आरोपी ही बरी होते हैं। आरोपी को कम से कम दस साल की सजा होती है। उम्र कै द और फांसी भी हो सकती है।





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