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नानकशाही कैलेंडर में तब्दीली संभव

अमृतसर. श्री अकाल तख्त के जत्थेदार जोगिंदर सिंह वेदांती और श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार बलवंत सिंह नंदगढ़ ने कहा कि नानकशाही कैलेंडर में तब्दीली संभव है। इसे इंसान ने ही बनाया है और इसमें गलती की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

निजी दौरे पर दरबार साहिब पहुंचे जत्थेदार नंदगढ़ ने कहा कि सिंह तख्त श्री पटना साहिब के जत्थेदार ज्ञानी इकबाल सिंह के बारे में सिंह साहिबान जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेंगे। बेशक उन्होंने कैलेंडर मामले में हुक्म जारी कर अधिकारों का दुरुपयोग किया है, लेकिन कोई भी फैसला लेने से पहले संगत और सभी पक्षों की राय ली जाएगी। वहींजत्थेदार वेदांती ने भी स्पष्ट किया कि नानकशाही कैलेंडर कमेटी अब भी कायम है।

अगर कैलेंडर को लेकर ज्ञानी इकबाल सिंह को कोई संदेह है तो वह कमेटी के समक्ष पक्ष रख सकते हैं। उसमें तबदीली अभी भी संभव है।

मौजूदा घटनाक्रम पर नर्म रुख अपनाते वेदांती ने कहा कि हर समस्या का मिल बैठकर हल निकाला जा सकता है। ज्ञानी इकबाल सिंह को बातचीत के लिए निमंत्रित करने पर उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर 5 फरवरी को अकाल तख्त पर सिंह साहिबान की बैठक में ही विचार हो सकता है। विचार के लिए तैयार : इकबाल सिंह

ज्ञानी इकबाल सिंह ने कहा है कि अकाल तख्त पर अगर उन्हें कैलेंडर में तबदीली करने संबंधी बातचीत में आमंत्रित किया जाता है तो वह इस पर चर्चा करने को तैयार हैं, लेकिन टकराव की नीति का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। बकौल इकबाल सिंह, उन्हें मजबूरी में नानकशाही कैलेंडर रद्द करने का आदेश जारी करना पड़ा था। कैलेंडर के अनुसार गुरुपर्व और शहीदी पर्व की तिथियों को लेकर उत्पन्न समस्या से सिख संगत काफी परेशान थी।

कमेटी के समक्ष रखें पक्ष : जत्थेदार त्रिलोचन सिंह तख्त श्री केसगढ़ साहिब के जत्थेदार ज्ञानी त्रिलोचन सिंह का कहना है कि ज्ञानी इकबाल सिंह को अकाल तख्त की सर्वोचता कबूल करनी चाहिए। ज्ञानी इकबाल सिंह को अपना हुक्म रद्द कर कमेटी के समक्ष पक्ष रखना चाहिए।

इस मामले पर तख्त श्री हजूर साहिब के जत्थेदार कुलवंत सिंह से तबियत ठीक न होने के कारण बात नहीं हो पाई।

मक्कड़ ने चुप्पी साधी नानकशाही कैलेंडर विवाद को लेकर एसजीपीसी प्रधान अवतार सिंह मक्कड़ ने कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि 31 जनवरी को कार्यकारिणी की बैठक का इंतजार किया जाए। इसके बाद ही वह क ुछ बोल पाएंगे।

-कैसे लागू हुआ कैलेंडर >> एनआरआई पाल सिंह पुरेवाल ने 20 दिसंबर, 02 को कैलेंडर मंजूरी के लिए अकाल तख्त को सौंपा।

>>23 दिसंबर, 02 को अकाल तख्त के जत्थेदार जोगिंदर सिंह वेदांती ने मंजूरी के लिए 11 सदस्यीय नानकशाही कैलेंडर कमेटी के गठन का फैसला किया।

>> 8 जनवरी, 07 को प्रो. दर्शन सिंह की अध्यक्षता में 11 सदस्यीय कमेटी गठित हुई। कमेटी की पहली मीटिंग 16 जनवरी, 03 को अकाल तख्त पर हुई।

>> मीटिंग में कमेटी ने सिखों के लिए अलग कैलेंडर की वकालत की।

>>28 मार्च, 03 को अकाल तख्त पर सिख बुद्धिजीवियों एवं संगठनों की बैठक के बाद एसजीपीसी को इसे लागू करने की हिदायत दी गई।

>> 29 मार्च, 03 के एसजीपीसी बजट इजलास में कैलेंडर लागू करने का ऐलान किया गया।





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