जयपुर. राजस्थान पुलिस अकादमी में चल रही 38वीं आल इंडिया पुलिस साइंस कांग्रेस के दूसरे दिन राजस्थान पुलिस में एसीबी में तैनात आई जी कपिल गर्ग ने फ्यूचरिस्टीक टेक्नोलॉजी फॉर पुलिस 2020 पर पत्र वाचन किया, जिसमें नैनो टेक्नोलॉजी के बारे में विस्तार से बताया। नैनो टेक्नोलॉजी में सूक्ष्मतम वस्तु की भी शीघ्र जांच हो सकती है। अभी तक डीएनए विश्लेषण में ही यह तकनीक काम में ली जाती रही है।
अब तक क्या होता आया और क्या होगा
* अब तक किसी भी घटना के बाद पुलिस अपने स्तर पर जांच करती है। घटनास्थल पर पुलिस सैंपल लेती है। लेबोरेटरी में कई महीनों तक सैंपल की जांच लंबित पड़ी रहती है। नैनो टेक्नोलॉजी से घटनास्थल पर ही जांच हो सकेगी। जांच में भी केवल 25 मिनट लगेंगे।
* किसी भी स्थान पर लंबे समय तक रहने से पुलिस के सामने अपने संसाधनों को रिचार्ज करने की समस्या होती है। बैटरी खत्म हो जाती है। इस समस्या से निजात के लिए प्लास्टिक टेप का निर्माण किया गया है, जो किसी भी वस्तु से संसाधनों के लिए ऊर्जा प्रदान कर सकता है तथा संसाधनों को रिचार्ज किया जा सकता है।
* अब तक पुलिस पुराने र्ढे से जांच करती आ रही है। पुलिस के पास आधुनिक संसाधनों की कमी है। विजन 2020 में पुलिस के पास पहनने वाला कम्प्यूटर होगा। जिसे घड़ी, लाकेट या अन्य किसी भी रूप में पहना जा सकेगा। यह कम्प्यूटर शरीर से ऊर्जा लेकर उसी के अनुरूप काम करेगा, लेकिन बोल नहीं सकेगा।
* 21वीं सदी में डुप्लीकेट वस्तुओं का प्रचलन काफी हद तक बढ़ गया है। डुप्लीकेट की पहचान करना भी मुश्किल हो रहा है। आने वाले समय में रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटीफिकेशन से आसानी से पहचाना जा सकेगा कि संबंधित चीज असली है या नकली। नकली में रेडियो फ्रीक्वेंसी नहीं होगी।
* अब तक पुलिस के पास केवल ऐसे यंत्र हैं, जो केवल विस्फोटक पदार्थो को पहचान सकते हैं। कुछ वर्ष बाद नैनो टेक्नोलॉजी की मदद से सूंघने वाली नाक के नाम से एक ऐसा यंत्र तैयार किया जा रहा है जो विस्फोटक पदार्थो के साथ ही खाने की चीजों में भी मिलावट की जानकारी देगा।
क्या है नैनो टेक्नोलॉजी
यह विज्ञान की ऐसी तकनीक है, जिसके इस्तेमाल से बेहद छोटे कम्प्यूटर, चिप्स तथा अन्य डिवाइस बनाई जा सकती हैं, जो वर्तमान तकनीक के जरिये संभव नहीं है। नैनो टेक्नोलॉजी भविष्य की ऐसी तकनीक है, जिसके इस्तेमाल से उत्पादों को मजबूत, वजन में हलका, अधिक साफ, कम खर्चीला और सटीक बनाया जा सकता है। इसका उपयोग कम्प्यूटर स्टोरेज, सेमीकंडक्टर, बायोटेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग और एनर्जी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।