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अपने लिए जिए तो क्या जिए

जालंधर. सड़कों पर स्ट्रे एनिमल्स जो कभी अपनी लाचारी की वजह से किसी दुर्घटना का शिकार बनते हैं तो कभी किसी दुर्घटना का कारण बनते हैं। जालंधराइट्स की ओर से ऐसी पहल जिसमें एनिमल्स को ध्यान में रखकर कदम उठाया जाए की खास जरूरत है।

शहर में एनिमल प्रोटैक्शन के लिए केवल पीएफऐ नामक एक ही संस्था है जो बेजुबान जानवरों के दर्द को समझते हुए काम कर रही है। सिटी में न तो कोई सामाजिक संस्था लगातार काम कर रही है और न ही प्रशासन की ओर से कोई पुख्ता कदम उठाया जा रहा है।

पीपल फॉर एनिमल

पीपल फार एनिमल एक ऐसी संस्था जो स्ट्रे एनिमल्स को संभालती है। 1996 में शुरू हुई इस संस्था में इस समय 150 के करीब जानवरों और पक्षियों की केयर की जा रही है।

यह संस्था किसी एक्सीडैंट का शिकार हो गए जानवर या किसी पालतू जानवर को भी अगर किसी ने घर से निकाल दिया हो तो उसे अडॉप्ट करती है। पुलिस लाइन में चल रही इस संस्था के सैक्रेटरी डा. जीएस बेदी ने बताया कि इस संस्था की चंडीगढ़, अमृतसर, दोराहा सहित अन्य शहरों में भी ब्रांच हैं।

नेक काम पर फंड की कमी

चंद्र भूषण ने बताया कि यह संस्था इन बेजुबानों के लिए बहुत कुछ करना चाहती है लेकिन फंड की कमी के कारण वह ज्यादा काम नहीं कर पा रहे।

यही कारण है कि वह चौगिट्टी में पीएफए की ओर से खरीदी गई जगह पर कोई डिवैलपमैंट का काम नहीं कर पा रहे। इस समय पीएफए के पास एक ही वैन है इसी कारण एमरजैंसी के दौरान उन्हें बाहर से गाड़ी हायर करनी पड़ती है।

एनिमल्स की संभाल जरूरी

कॉपरेरेशन कमिश्नर सीएस तलवाड़ ने बताया कि पिछले 15 दिनों में शहर में से 100 से ज्यादा गाय को गौशाला या अन्य उपयुक्त स्थान पर पहुंचाया गया है। कॉपरेरेशन की इस मुहिम में शहर की कुछ सामाजिक संस्थाएं बहुत ही अच्छा काम कर रही हैं। इसी तरह स्ट्रे-डॉग्स के लिए भी डॉग-कैचर मंगवाए गए हैं। समय समय पर कुत्तों को पकड़ा जाता है।





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