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Fashion N Beauty Fashion N Beauty जयपुर.
मात्र पंद्रह दिनों में झुर्रियों का नजर आना 70 परसेंट तक कम करें ..। डर्मेटलॉजिस्ट से प्रमाणित । ये शब्द झुर्रियां कम करने का दावा करने वाले प्रोडक्ट्स में बार-बार दोहराए जाते हैं। कुछ कम्पनियां मात्र पंद्रह हफ्तों में चेहरे को गोरा करने का दावा करते हुए कहती हैं कि बढ़ती उम्र को छुपा कर जवां रहना चाहती हैं तो ये क्रीमें अपनाएं। ये शब्द टीवी पर आने वाले विज्ञापनों में कहे जाते हैं। जवां बने रहने की चाहत में महिलाएं एंटी एजिंग या झुर्रियां कम करने वाली क्रीम के लिए मंहगे दाम देने से भी परहेज नहीं करती। इसे कॉस्मेटिक मार्केट सर्वे- 2007 के आंकड़े साबित करते हैं। इसके मुताबिक पिछले दो साल में एंटी एजिंग क्रीम की बिक्री 72 परसेंट बढ़ी है।
सुंदर दिखना कोई बुरी बात नहीं है लेकिन सवाल ये है कि क्या ये क्रीम वाकई में महिलाओं की उम्र कम दिखा पाती हैं? एंटी ऐजिंग क्रीम यूज करने वाली कुछ महिलाओं ने वुमन भास्कर को बताया कि इसे लगाने के बाद कुछ घंटे तक तो चेहरा दमकता है लेकिन बाद में स्किन डल हो जाती है। ये भी सामने आया कि लगातार क्रीम लगाते रहने पर तो चेहरे पर असर नजर आता है लेकिन इसे लगाना बंद करते ही स्किन पहले से भी डल नजर आने लगती है। कई बार चेहरे पर सूजन, खुजली और खिंचाव जैसी प्रॉब्लम भी हो जाती हैं।
साइकलॉजिकल इफैक्ट
एसएमएस हॉस्पिटल के स्किन स्पेशलिस्ट यू. एस. अग्रवाल कहते हैं कि कस्टमर की डिमांड पर ही कम्पनियां एंटी ऐजिंग क्रीम मार्केट में उतार रहीं हैं जो आसानी से बिक भी रही है। चिकित्सक की तौर तो यही कहूंगा कि ये एंटी ऐजिंग क्रीम स्किन को परमानेंट रिलीफ नहीं बल्कि यूज करने वाले को किसी की ऑइली स्किन है तो किसी की सेंसिटिव। इस तरह की क्रीम के लिए डॉक्टर से प्रिस्क्राइब कराना जरूरी नहीं है। इनका रजिस्ट्रेशन ओवर द काउंटर (ओटीसी) के तहत करवाया जाता है। कॉस्मेटिक कंम्पनियां इसी का फायदा उठा रही हैं। ये भी जरूरी नहीं कि क्रीम का अचानक रिएक्शन हो, स्लो रिएक्शन भी हो सकता है। इसलिए यूज करने से पहले डॉक्टर से कंसल्ट कर लें तो बेहतर होगा।
भ्रामक विज्ञापन-कंज्यूमर कोर्ट है ना
हर कम्पनी अपना प्रोडक्ट सेफ होने का दावा करती है। लेकिन वे इतने सेफ नहीं होते। ऐसी सिचुएशन में कंज्यूमर को क्या करना चाहिए। कंज्यूमर एक्शन एंड नेटवर्क सोसायटी के मुख्य संरक्षक डॉ. अनंत शर्मा ने इस सवाल पर कहा कि कॉस्मेटिक से जुड़े मामलों के लिए भी कंज्यूमर अवेयरनेस लानी होगी। अगर कॉस्मेटिक के लिए किया गया दावा सही नहीं है तो कज्यूमर कोर्ट में अपील की जा सकती है। कंज्यूमर को अगर विज्ञापन भ्रामक लगता है तो भी वह ‘औषधि व चमत्कारिक उपचार अधिनियम- 1954 और इंडियन ड्रग कॉस्मेटिक एक्ट ’ के तहत मुकदमा लड़ सकता है। पत्र या ई-मेल के जरिए भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। या फिर यहां भी शिकायत दर्ज करवाई जा सकती है -1-
भारतीय विज्ञापन माणक परिषद
205, बॉम्बे मार्केट, ताड़देव रोड,मुम्बई
2- कंज्यूमर एक्शन एंड नेटवर्क सोसायटी (केन्स)
21-गंगवाल पार्क, जयपुर
क्या है डी एम ए ई
डी एम ए ई यानी ‘डाइमिथाइल एमिनो एथनॉल’। इस कैमिकल को कम्पनियां एंटी रिंकल क्रीम और फेस लिफ्टिंग प्रोडक्ट में इस्तेमाल करती हैं। फेस के डैमेज्ड सैल्स को यह कुछ घंटो के लिए एक्टिव कर देता है जिससे चेहरा जवां लगता है। यह कैमिकल मछली के शरीर में भी पाया जाता है। ब्रिटेन के डर्मेटलॉजिस्ट एनी हर्ा्िडग ने हाल में डी एम ए ई कैमिकल पर किए रिसर्च में बताया कि इससे बने प्रोडक्ट फेस के लिए घातक होते हैं। इसके यूज से फेस पर सूजन आ जाती है। जिससे फेस लाल और चमकदार दिखाई देने लगता है। लोग इसे क्रीम से आने वाली चमक समझ लेते हैं। लगाने के बाद ये चेहरे की सैल्स फुला देता है मगर कुछ घंटे बाद सैल्स में खिंचाव पैदा कर उन्हें तोड़ देता है।
प्रिस्क्राइब होनी चाहिए क्रीम
क्रीम के टीवी या मैग्जीन एड में यह स्पष्ट नहीं किया जाता कि क्रीम कितनी मात्रा में लगाई जाए, कितनी उम्र के बाद इसे प्रयोग करना चाहिए। क्रीम में मौजूद कैमिकल और अन्य चीजों के बारे में भी जानकारी नहीं होती। स्टेट कैमिस्ट एसोसिएशन के प्रेसिडेंट आर. बी. पुरी का कहना है कि ड्रग एक्ट के तहत कॉस्मेटिक रजिस्टर नहीं करवाए जाते हैं। इसलिए डॉक्टर इसे प्रिस्क्राइब नहीं करते हैं। कम्पनियां पब्लिसिटी चालाकी से करती हैं। जैसे क्रीम में विटामिन-ई का उल्लेख बढ़ा चढ़ाकर किया जाता है। इसे रिसर्च के अनुसार प्रमाणित बताया जाता है, ताकि लोग इस पर विश्वास करें। लम्बे समय तक क्रीम सुरक्षित रखने के लिए इसमें कैमिकल मिलाए जाते हैं। जिसकी बहुत कम जानकारी दी जाती है। जबकि इसे जानने का कंज्यूमर को अधिकार है।